8 साल से नहीं आया एक भी छात्र! नालंदा का सरकारी स्कूल बना ‘भूत बंगला’। करोड़ों की स्कूल बिल्डिंग पर लटका ताला
राकेश कुमार
हरनौत (नालंदा)। बिहार सरकार जहां एक ओर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने का दावा कर रही है, वहीं नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय महवाचक की स्थिति इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। इस विद्यालय में पिछले आठ वर्षों से एक भी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है। वर्ष 2018 से लगातार छात्र संख्या शून्य बनी हुई है। नतीजतन विद्यालय पूरी तरह बंद पड़ा है और यहां अब नियमित रूप से कोई शिक्षक भी तैनात नहीं है।
करीब चार दशक पुराने इस सरकारी विद्यालय की दो मंजिला (जी+1) इमारत आज गांव के बीचों-बीच वीरान खड़ी है। मुख्य द्वार पर जंग लगा ताला लटका है। परिसर में झाड़ियां, घास और छोटे-छोटे पेड़ उग आए हैं। लंबे समय से विद्यालय बंद रहने के कारण यहां सांप-बिच्छू समेत अन्य विषैले जीवों का बसेरा हो गया है। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि कभी बच्चों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला यह विद्यालय अब किसी ‘भूत बंगले’ जैसा दिखाई देता है। शाम के बाद लोग इसके आसपास जाने से भी कतराते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार एक समय ऐसा था जब विद्यालय में सुबह की प्रार्थना, बच्चों की किलकारियां और मध्याह्न भोजन की खुशबू पूरे गांव में महसूस होती थी। आज वही विद्यालय पूरी तरह सुनसान पड़ा है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित सरकारी भवन उपयोग के अभाव में धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने बताया कि विद्यालय की स्थापना वर्ष 1980 में हुई थी। शुरुआती वर्षों में यहां 50 से 60 छात्रों का नामांकन रहता था, जबकि प्रतिदिन 30 से 40 छात्र नियमित रूप से पढ़ाई करने आते थे। वर्ष 2012-13 तक विद्यालय की स्थिति संतोषजनक थी और उपस्थिति भी अच्छी रहती थी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में गांव सड़क मार्ग से जुड़ने के बाद अभिभावकों ने अपने बच्चों का नामांकन आसपास के बड़े और अपेक्षाकृत बेहतर विद्यालयों में कराना शुरू कर दिया। इसके बाद यहां छात्रों की संख्या लगातार घटती गई और वर्ष 2018 में नामांकन पूरी तरह शून्य हो गया। तब से आज तक विद्यालय में एक भी छात्र नामांकित नहीं है।
विद्यालय में बच्चों को आकर्षित करने के लिए मध्याह्न भोजन, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, स्कूल ड्रेस, छात्रवृत्ति, साइकिल योजना सहित सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। इसके अलावा ग्रामीणों को जागरूक करने और घर-घर संपर्क अभियान भी चलाया गया, लेकिन इन प्रयासों का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। अभिभावकों ने अपने बच्चों का नामांकन इस विद्यालय में नहीं कराया।
प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि पहले यू-डाइस (UDISE) पोर्टल पर अनुमानित छात्र संख्या दर्ज कर दी जाती थी, जिससे विद्यालय को बजट और अन्य सुविधाएं मिल जाती थीं। लेकिन अब यू-डाइस प्लस (UDISE+) प्रणाली में प्रत्येक छात्र का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य है। ऐसे में वास्तविक स्थिति के अनुसार विद्यालय में शून्य नामांकन दर्ज किया जा रहा है।
महवाचक, छतियाना राजस्व गांव का एक छोटा टोला है। यहां लगभग 70 से 75 परिवार रहते हैं। गांव की आबादी करीब 1,000 है और लगभग 450 मतदाता हैं। अधिकांश परिवारों के सदस्य नौकरी, व्यवसाय या अन्य रोजगार से जुड़े हैं। कई परिवार अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए शहरों या दूसरे गांवों में रहने लगे हैं। गांव में रहने वाले अधिकांश लोग बुजुर्ग हैं, जबकि स्कूली उम्र के बच्चे अन्य विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।
विद्यालय में पहले एक पुरुष शिक्षक और दो महिला शिक्षिकाएं पदस्थापित थीं। छात्रों की अनुपस्थिति को देखते हुए सभी शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में प्रतिनियुक्त कर दिया गया। जानकारी के अनुसार पिछले चार दिनों से दोनों महिला शिक्षिकाओं की इस विद्यालय में दैनिक उपस्थिति भी दर्ज नहीं हो रही है। वर्तमान में विद्यालय पूरी तरह छात्रों और शिक्षकों से खाली है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को इस विद्यालय के भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। यदि गांव में छात्र नहीं हैं तो विद्यालय भवन का उपयोग पुस्तकालय, कौशल प्रशिक्षण केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन, डिजिटल शिक्षा केंद्र अथवा अन्य सरकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है, ताकि करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति बेकार न पड़े।
इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) नितेश कुमार रंजन ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार नामांकन बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अभिभावकों को जागरूक भी किया गया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में छात्र नहीं होने के कारण पिछले दो वर्षों से यहां पदस्थापित सभी शिक्षकों को उत्क्रमित मध्य विद्यालय (यूएमएस) छतियाना में प्रतिनियुक्त किया गया है, जहां वे नियमित रूप से शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालय महवाचक की यह तस्वीर शिक्षा व्यवस्था के सामने कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है। एक ओर सरकार शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर एक सरकारी विद्यालय आठ वर्षों से बिना छात्र और बिना शिक्षक के वीरान पड़ा है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग विद्यालय के भविष्य को लेकर जल्द ठोस निर्णय ले, ताकि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कायम रहे।
