चिंतन शिविर में चमका बिहार मॉडल, खेल प्रतिभा खोज की पहल को मिली राष्ट्रीय सराहना

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पटना : देश में खेलों के समग्र विकास और आगामी ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन की रणनीति को लेकर 25 अप्रैल को श्रीनगर में आयोजित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के युवा मामले एवं खेल मंत्रियों के चिंतन शिविर में बिहार का मॉडल खास चर्चा में रहा। खेल प्रतिभा पहचान और विकास के क्षेत्र में बिहार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को न केवल सराहा गया, बल्कि अन्य राज्यों को भी इसे अपनाने की सलाह दी गई।

शिविर में देशभर से आए खेल विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और प्रतिभा निखारने के उपायों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण ने अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी एवं कोच पुलेला गोपीचंद के साथ मिलकर ‘टैलेंट आइडेंटिफिकेशन एंड डेवलपमेंट’ विषय पर राज्य के प्रयासों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

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बिहार के इस मॉडल ने उपस्थित प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया और इसे काफी प्रभावी पहल बताया गया। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए कहा कि बिहार का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने संकेत दिया कि इस दिशा में नीति-निर्माण के लिए एक स्थायी टीम बनाकर कार्य किया जाएगा, ताकि देशभर में इस मॉडल को लागू किया जा सके।

वहीं, केंद्रीय राज्य खेल मंत्री रक्षा खड़से ने भी अपने संबोधन में बिहार की खेल नीतियों और योजनाओं की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा प्रतिभा खोज और विकास के लिए किए जा रहे प्रयास देश के खेल परिदृश्य को नई दिशा दे सकते हैं।

चिंतन शिविर में शामिल अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी बिहार में खेल के क्षेत्र में हो रहे निरंतर सुधार और योजनाबद्ध विकास की सराहना की। उन्होंने माना कि बिहार का यह मॉडल खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक सशक्त उदाहरण बन सकता है।

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