राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता के प्रतीक थे वीर सावरकर : डॉ. सुनील कुमार

0
IMG-20260528-WA0111

बिहार शरीफ (नालंदा) : आज स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के 143वीं जयंती पर बिहार शरीफ विधानसभा के विधायक डा सुनील कुमार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्हें स्मरण करते हुए कहा कि वीर सावरकर स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि वे दूरदर्शी राष्ट्र निर्माता भी थे। उन्होंने भारत को एक शक्तिशाली, संगठित और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में देखने का सपना देखा था। उनका मानना था कि कोई भी राष्ट्र तभी महान बन सकता है जब उसके नागरिक राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानें, समाज में एकता हो, विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा मिले तथा देश आत्मनिर्भर बने।

उनके विचारों का प्रभाव समय-समय पर अनेक राष्ट्रीय नेताओं पर पड़ा। विशेष रूप से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रहित के मार्ग में वीर सावरकर के अनेक सिद्धांतों को अपनाते हुए भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध और शक्तिशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वीर सावरकर के राष्ट्र निर्माण संबंधी विचारों को आधुनिक भारत के निर्माण में व्यापक रूप से लागू करने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री मोदी जी का “आत्मनिर्भर भारत” अभियान वीर सावरकर की आत्मनिर्भरता की सोच को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। वीर सावरकर चाहते थे कि भारत आर्थिक, सैन्य और तकनीकी रूप से इतना मजबूत बने कि उसे किसी विदेशी शक्ति पर निर्भर न रहना पड़े। मोदी जी ने “मेक इन इंडिया”, “स्टार्ट अप इंडिया”, “डिजिटल इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसी योजनाओं के माध्यम से देश के उद्योग और युवाओं को नई दिशा प्रदान की।
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने रक्षा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता पर विशेष बल दिया। आज भारत में स्वदेशी हथियार, मिसाइल, युद्धपोत और रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़ा है। “मेक इन इंडिया” के अंतर्गत रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहन देकर भारत को रक्षा क्षेत्र में मजबूत बनाने का प्रयास किया गया। यह वही विचार है जिसे वीर सावरकर ने वर्षों पहले राष्ट्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया था।
वीर सावरकर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव के समर्थक थे। माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी भारत की सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने का कार्य किया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की मान्यता, काशी विश्वनाथ धाम का विकास, अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण तथा भारतीय परंपरा को विश्व मंच पर सम्मान दिलाना, भारत की सांस्कृतिक शक्ति को मजबूत करने वाला कदम है। इससे देशवासियों में आत्मगौरव और राष्ट्रीय चेतना का विस्तार हुआ है।

विदेश नीति के क्षेत्र में भी माननीय प्रधानमंत्री जी ने भारत की प्रतिष्ठा को मजबूत किया है। आज विश्व मंच पर भारत की आवाज को गंभीरता से सुना जाता है। भारत ने 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण, कश्मीर, लद्दाख, रक्षा और कूटनीति जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ रहा है। वीर सावरकर एक ऐसे भारत का सपना देखते थे जो आत्मविश्वास से विश्व के सामने खड़ा हो। वर्तमान समय में भारत की

बढ़ती आबादी, राष्ट्रीय एकता और देश को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी ने राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारत को मजबूत बनाने का प्रयास किया। उन्होंने लोकतंत्र, विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव को एक साथ आगे बढ़ाया। वीर सावरकर के विचारों में राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान, राष्ट्र और संगठन की भावना समावेश थी। इन मूल्यों को अपनाकर भारत ने नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है।
आज भारत विश्व की कई अर्थव्यवस्था में शामिल हो रहा है, विज्ञान, अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, सेना शक्ति और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भारत विश्व पटल पर खड़ा है। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक है। वीर सावरकर के आत्मनिर्भर भारत का सपना आज धीरे-धीरे वास्तविक बनता दिखाई दे रहा है।

अंत में यह कहा जा सकता है कि वीर सावरकर के राष्ट्रवादी विचारों और सिद्धांतों ने भारत की राजनीति और राष्ट्र निर्माण की धारा को गहराई से प्रभावित किया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भारत को परमाणु शक्ति और विकासशील राष्ट्र के रूप में नई दिशा दी, जबकि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक गौरव
और वैश्विक मंच पर भी भारत को आगे बढ़ाया। दोनों नेताओं ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए भारत को समृद्ध, आत्मनिर्भर और शक्तिशाली बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जब वीर सावरकर के सपनों के भारत की ओर बढ़ता हुआ सशक्त कदम है।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *