फरक्का जल संधि के नवीनीकरण का विरोध, बिहार के हक के लिए जदयू ने उठाई आवाज

0
20260911_134612

‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन, जिला जदयू ने प्रेसवार्ता कर गिनाए बिहार के नुकसान

फरक्का (गंगा) जल संधि को बिहार के हितों के प्रतिकूल बताते हुए जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने इसके नवीनीकरण का विरोध किया है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी नेताओं ने कहा कि बिहार के हक और बिहारवासियों के हितों की रक्षा के लिए फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार जरूरी है। इसी उद्देश्य से जदयू की ओर से चलाए जा रहे ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान के तहत लोगों को इस मुद्दे के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

प्रेसवार्ता में बताया गया कि जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों—बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार—में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई है और इसका समापन कटिहार में होगा। नेताओं ने कहा कि गंगा बिहार में बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है, इसलिए इन जिलों को अभियान से जोड़ा गया है।

जिला जदयू नेताओं ने कहा कि पार्टी का स्पष्ट मत है कि वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि भारत, विशेषकर बिहार के हित में नहीं है। हाल में संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने राज्यसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा था कि संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। यदि भविष्य में कोई समझौता होता है तो उसमें वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

जदयू नेताओं के मुताबिक, शुष्क मौसम में 1 जनवरी से 31 मई के बीच बक्सर के पास गंगा का प्रवाह काफी कम हो जाने के बावजूद फरक्का से बांग्लादेश की ओर निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ा जाता है। पार्टी का दावा है कि इससे बिहार के जल संसाधनों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और राज्य के किसानों की सिंचाई, पेयजल, उद्योगों तथा लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

प्रेसवार्ता में फरक्का बराज से होने वाले कथित नुकसान का भी मुद्दा उठाया गया। जदयू नेताओं ने कहा कि फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा हुआ है, जिसके चलते उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ की समस्या गंभीर होती जा रही है। वहीं, शुष्क मौसम में पानी की कमी के कारण बिहार के कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने का दावा किया गया।

पार्टी नेताओं ने कहा कि फरक्का जल संधि का कथित 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार को उठाना पड़ रहा है, जो राज्य के साथ अन्याय है। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय से फरक्का बराज और जल संधि से बिहार को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाते रहे हैं।

नेताओं ने कहा कि ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ किसी राजनीतिक उद्देश्य से चलाया जा रहा अभियान नहीं, बल्कि बिहार के जनहित से जुड़ा विषय है। लोगों को यह जानना जरूरी है कि फरक्का जल संधि का बिहार के जल संसाधनों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। पार्टी का उद्देश्य बिहार की आवाज को केंद्र सरकार तक पहुंचाना और गंगा से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाना है।

प्रेसवार्ता में कहा गया कि इस मुद्दे को लेकर जदयू के अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी पार्टी मुख्यालय में फरक्का जल संधि को लेकर प्रेसवार्ता कर चुके हैं। जदयू नेताओं ने केंद्र से बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार करने की मांग की।
इस मौके पर जदयू जिला अध्यक्ष मोहम्मद अरशद, जदयू प्रवक्ता भवानी सिंह, प्रदुमन कुमार सहित कई गणमान्य लोगों उपस्थित रहे हैं।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *