नालंदा खुला विश्वविद्यालय में ‘ग्रेजुएट इम्प्लॉयबिलिटी’ पर त्रिदिवसीय कार्यशाला शुरू

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राजीव लोचन की रिपोर्ट, बिहारशरीफ (नालंदा): नालंदा खुला विश्वविद्यालय में मंगलवार, 17 फरवरी 2026 से ‘ग्रेजुएट इम्प्लॉयबिलिटी’ विषय पर त्रिदिवसीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। यह कार्यशाला 17, 18 और 19 फरवरी तक आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10 बजे दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. किरण पाण्डेय ने किया। कुलसचिव प्रो. अभय कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई उन्हें रोजगार प्राप्त करने में सहायक बने।

कुलपति प्रोफेसर रवींद्र कुमार ने कहा कि वे पिछले 40–42 वर्षों से शिक्षा जगत से जुड़े हैं और हमेशा यह प्रयास रहा है कि विद्यार्थी शिक्षा के साथ रोजगार भी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए, जिनसे शिक्षार्थियों को व्यावहारिक लाभ मिले और वे रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।

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उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ‘उन्नत भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत आसपास के पांच गांवों को गोद लेकर समाज में जागरूकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा का स्तर रोजगारोन्मुखी है, उसी प्रकार अन्य विश्वविद्यालयों को भी अपने पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण व्यवस्था को सशक्त बनाना चाहिए।

कार्यशाला से ऑनलाइन जुड़े डॉ. बी. शैडरक, डायरेक्टर कोल सेमका ने कुलपति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को रोजगारपरक बनाने के लिए यूजीसी स्तर पर भी पहल आवश्यक है। बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षा के साथ रोजगार उन्मुखी कार्यक्रम चलाने से ही शिक्षा समाज के लिए अधिक उपयोगी सिद्ध होगी।

ग्रेजुएट इम्प्लॉयबिलिटी की सलाहकार डॉ. विद्या एम. अय्यर ने विश्वविद्यालय को इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में विभिन्न कौशलों का विकास करना समय की मांग है, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उद्योगों के लिए तैयार हो सकें।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. अमरनाथ पाण्डेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगी। अंत में डॉ. पल्लवी ने कुलपति, कुलसचिव, मीडिया प्रतिनिधियों, प्रतिभागी शिक्षकों, शिक्षार्थियों एवं शिक्षकेतर कर्मियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस कार्यशाला में बिहार राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों के शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल हुए। इनमें पूर्णिया विश्वविद्यालय, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय सहित नालंदा खुला विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्रों से जुड़े शिक्षक भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में डॉ. साजिदा अंजुम, मेधा चौहान, हिमानी सिंह, डॉ. श्याम किशोर सिंह, डॉ. महजबी प्रवीन, डॉ. अमृता कुमारी, डॉ. श्रवण कुमार, आफताब अहमद, सरफराज आलम सहित कई शिक्षकों ने भाग लिया। इसके अलावा रवि कुमार, नाशित इमाम, अमर कुमार, संजय कुमार, मुकेश कुमार गौरव, पवन कुमार और अर्जुन प्रसाद भी उपस्थित रहे।

कार्यशाला के माध्यम से विश्वविद्यालय का लक्ष्य शिक्षा को रोजगार से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है।

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