जेल में बंदी की पहचान में चूक, दूसरे विचाराधीन कैदी को कर दिया रिहा; तीन जेलकर्मी निलंबित
नालंदा में बंदियों की अदला-बदली कर अनधिकृत रिहाई का मामला आया सामने, डीएम के निर्देश पर एसडीओ और एसडीपीओ की संयुक्त जांच में लापरवाही उजागर
बिहारशरीफ (नालंदा)। नालंदा में जेल से बंदी की अनधिकृत रिहाई का मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही और चूक पाए जाने पर जेल उपाधीक्षक अरविंद कुमार, जेल सहायक अधीक्षक अमरेंद्र कुमार तथा कक्षपाल सह प्रवेश शाखा सहायक नवीस कुमार को निलंबित कर दिया गया है। तीनों कर्मियों के विरुद्ध संबंधित प्राधिकारी एवं विभाग की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 7 और 8 अक्टूबर 2026 को सूचना मिली कि अस्थावां थाना कांड संख्या 203/26 एवं 201/26 के विचाराधीन बंदी सतीश चौहान उर्फ सतीश बिंद, पिता नागो बिंद उर्फ नागो चौहान, निवासी सोयवापर, थाना अस्थावां, जिला नालंदा के स्थान पर अस्थावां थाना कांड संख्या 362/25 के दूसरे विचाराधीन बंदी चंद्रदीप चौहान उर्फ चंद्रदीप बिंद, पिता नागो बिंद उर्फ नागो चौहान, निवासी सोयवापर, थाना अस्थावां, जिला नालंदा को अनधिकृत रूप से जेल से रिहा कर दिया गया था। यह घटना 24 सितंबर 2026 से संबंधित बताई गई है।
मामला संज्ञान में आने के बाद जेल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सतीश चौहान उर्फ सतीश बिंद को 2 अक्टूबर 2026 को पूर्वाह्न में जेल से मुक्त कर दिया। वहीं, अनधिकृत रूप से रिहा हुए चंद्रदीप चौहान उर्फ चंद्रदीप बिंद ने भी 2 अक्टूबर 2026 को माननीय न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद उसी दिन अपराह्न तीन बजे उसे नियमानुसार दोबारा जेल में बंद कर दिया गया।
डीएम के निर्देश पर हुई संयुक्त जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर बिहारशरीफ के अनुमंडल पदाधिकारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 को संयुक्त रूप से जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। दोनों अधिकारियों ने मामले की जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया जेल उपाधीक्षक अरविंद कुमार, जेल सहायक अधीक्षक अमरेंद्र कुमार और कक्षपाल सह प्रवेश शाखा सहायक नवीस कुमार की लापरवाही एवं चूक सामने आई।
संयुक्त जांच के निष्कर्षों के आधार पर तीनों कर्मियों को निलंबित कर दिया गया। साथ ही, संबंधित प्राधिकारी एवं विभाग की ओर से उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
इस घटना ने जेल में बंदियों की पहचान, अभिलेखों के सत्यापन और रिहाई की प्रक्रिया में बरती जाने वाली सावधानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से मामले में जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है।
