बिहार-नेपाल सीमा पर सरकार का बड़ा अभियान, 1349 अतिक्रमण हटाए गए, संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी
पटना, संवाददाता। बिहार सरकार ने भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सीमा क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, गायब सीमा पिलरों की बहाली, संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जांच तथा साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि नो-मेन्स लैंड और सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों, संदिग्ध निवेश और अवैध वित्तीय लेन-देन पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया।
1349 अतिक्रमण हटाए गए
नेपाल से लगी बिहार की 735 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चलाए गए विशेष अभियान के तहत नो-मेन्स लैंड में चिन्हित 1359 अतिक्रमणों में से 1349 को हटाया जा चुका है। केवल 10 मामले शेष हैं, जिन्हें जल्द हटाने का निर्देश दिया गया है। पश्चिम चंपारण, मधुबनी और अररिया जिलों में सभी चिन्हित अतिक्रमण पूरी तरह हटाए जा चुके हैं।
सीमा क्षेत्र में भी कार्रवाई
सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में सरकारी भूमि पर किए गए 996 अतिक्रमणों में से 879 को हटाया जा चुका है, जबकि 117 मामलों में कार्रवाई जारी है। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को नए अतिक्रमणों को रोकने के लिए सतर्क रहने को कहा।
1155 सीमा पिलर गायब
समीक्षा बैठक में बताया गया कि बिहार-नेपाल सीमा पर कुल 5343 सीमा पिलर हैं। इनमें 3771 पिलर सही स्थिति में हैं, 317 क्षतिग्रस्त हैं, 1155 पिलर गायब हैं तथा 100 पिलरों का निर्माण अभी होना बाकी है। मुख्य सचिव ने संबंधित एजेंसियों को गायब और क्षतिग्रस्त पिलरों की बहाली की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया।
संदिग्ध संस्थानों की पहचान
सीमावर्ती जिलों में एसएसबी और जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान में कई संदिग्ध संस्थानों की पहचान की गई है। सीतामढ़ी में 28, किशनगंज में 21, पश्चिम चंपारण में 9, मधुबनी और सुपौल में 6-6 तथा अररिया और पूर्वी चंपारण में 5-5 संस्थान जांच के दायरे में आए हैं। इन मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
अररिया में विदेशी निवेश की जांच
अररिया जिले में कुछ संस्थाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में संदिग्ध विदेशी निवेश तथा वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद मामले की विस्तृत जांच आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा को सौंपने का निर्णय लिया गया है।
साइबर ठगी पर भी शिकंजा
सीमावर्ती जिलों में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए अभियान में बड़ी कार्रवाई की गई है। जांच में पता चला कि ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश और नौकरी का झांसा देकर लोगों से ठगी की जा रही थी तथा इसके लिए म्यूल खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान बेतिया में 78 बैंक खाते फ्रीज किए गए और पांच प्राथमिकी दर्ज की गईं। बगहा में 18 म्यूल खातों की जांच के दौरान चार मामले दर्ज कर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अन्य सीमावर्ती जिलों में 33 मामले दर्ज कर 148 खातों को फ्रीज किया गया है।
बैंक कर्मियों का होगा सत्यापन
मुख्य सचिव ने सीमावर्ती जिलों में कार्यरत सभी बैंक कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने का निर्देश दिया। साथ ही बैंकों को संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से संबंधित रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने को कहा गया। राज्य की 1292 बैंक शाखाओं में नकली नोट पहचानने वाली मशीनें लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से 1259 शाखाओं में मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में मजबूत होगी निगरानी
पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मौजूद 29 एसएसबी चौकियों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का निर्णय लिया गया है। एसएसबी और वन विभाग के अधिकारियों को हर महीने दो संयुक्त बैठकें करने तथा नियमित गश्त सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
बैठक के अंत में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और सुरक्षा एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने तथा राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को समय रहते विफल करने का निर्देश दिया।
