वैदिक मंत्रोच्चार के साथ डोलाया गया मेले का ध्वज :तैंतीस कोटि देवी-देवता अपने गंतव्य को लौटे, सोमवती अमावस्या स्नान को रही आखिरी दिन भीड़

0
WhatsApp Image 2026-06-15 at 10.16.45 PM

राजगीर(नालंदा)। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सोमवार को तीर्थ पुरोहितों व साधु-संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पुरुषोत्तम मास के ध्वज को डोलाया गया। ब्रह्मकुंड क्षेत्र स्थित धर्मध्वज स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं, तीर्थ पुरोहितों और पंडा समाज के लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। पंडा कमेटी के प्रवक्ता सुधीर कुमार उपाध्याय ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार धर्मध्वज के दर्शन और स्पर्श से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण रहा कि ध्वज अवतरण के दौरान श्रद्धालुओं में दर्शन और स्पर्श करने की होड़ लगी रही। ऐसी मान्यता है कि ध्वज के डोलने के साथ ही समस्त कोने से आये हुए सभी तैंतीस कोटि देवी-देवता अपने निवास स्थान(गतंव्य) को वापस लौट जाते हैं। वेदों के मंत्रोच्चार कर सभी देवी-देवताओं से अपने-अपने गंतव्य स्थान पर निवास करने को प्रतिष्ठान हो जाने के लिए नम्र निवेदन किया गया, और देवता अपने गंतव्य को प्रस्थान कर गये। इस पुरुषोत्तम मास मेले की शुरुआत 17 मई को हुई थी। इसमें देश के विभिन्न कोने से आये हुए लाखों श्रद्धालुओं ने यहां के विभिन्न कुंडों व धाराओं में स्नान किया। अध्यात्म, आस्था और सनातन परंपराओं के अद्भुत संगम के रूप में विख्यात पुरुषोत्तम मास शांति रूप से समापन हुआ।


ब्रह्मकुंड और सप्तधारा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

सोमवती अमावस्या के कारण मेले के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अहले सुबह से ही ब्रह्मकुंड और सप्तधारा में स्नान के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंडों में स्नान कर भगवान विष्णु सहित विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि तथा लोककल्याण की कामना की।


एक माह तक चला आस्था का महापर्व

अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के डॉ. धीरेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि एक माह तक चले इस महापर्व के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु राजगीर पहुंचे। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और भारी भीड़ के बावजूद मेला शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और भक्तिमय वातावरण में पूरा हुआ। लोगों ने श्रद्धा भाव से यहां के कुंडों में डुबकी लगायी।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *