25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद खत्म, बिहार-झारखंड में ऐतिहासिक समझौता
बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2 एमएएफ पानी मिलेगा, दक्षिण बिहार और सूखा प्रभावित क्षेत्रों को होगा बड़ा लाभ
पटना/नई दिल्ली। बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर पिछले करीब 25 वर्षों से चला आ रहा विवाद अब खत्म होने की दिशा में है। नई दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने इस समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता केवल जल बंटवारे से जुड़े पुराने विवाद का समाधान नहीं है, बल्कि बिहार और झारखंड के बीच सहयोग, विश्वास और साझा विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत है।
बिहार को 5.75 एमएएफ, झारखंड को 2 एमएएफ जल
समझौते के तहत सोन नदी के जल में बिहार को 5.75 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) तथा झारखंड को 2.00 एमएएफ जल आवंटित करने पर औपचारिक सहमति बनी है। इससे दक्षिण बिहार के साथ-साथ झारखंड के पठारी और सूखा प्रभावित इलाकों में पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौते के बाद सोन नदी के जल के बेहतर उपयोग के लिए जलाशयों के निर्माण तथा सोन नदी को फल्गु नदी से जोड़ने की प्रस्तावित परियोजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा सकेगा। इन परियोजनाओं से गया सहित दक्षिण बिहार के कई क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
फल्गु नदी में पानी बढ़ने से पिंडदान में भी सुविधा
सोन नदी के पानी को फल्गु नदी से जोड़ने की परियोजना का धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। फल्गु नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध रहने से गया जी में आयोजित होने वाले पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को तर्पण और पिंडदान में सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने इस समझौते को बिहार और झारखंड के लिए जल सुरक्षा, बेहतर जल प्रबंधन और साझा विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। लंबे समय से लंबित विवाद के समाधान से दोनों राज्यों के बीच जल संसाधनों के बेहतर और समन्वित उपयोग का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
