इमली बीघा रेलवे हॉल्ट का प्लेटफॉर्म बना जंगल, जहरीले सांप-बिच्छुओं का बढ़ा खतरा
साफ-सफाई और पेयजल की व्यवस्था नहीं, टूटे प्लेटफॉर्म से ट्रेन पकड़ने में यात्रियों को हो रही परेशानी
नालंदा जिले के रहुई प्रखंड क्षेत्र में स्थित इमली बीघा रेलवे हॉल्ट इन दिनों रेलवे विभाग की उपेक्षा का शिकार है। यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए इस हॉल्ट का प्लेटफॉर्म वर्तमान में घास-फूस, झाड़ियों और पेड़-पौधों से घिरकर जंगल में तब्दील हो गया है। प्लेटफॉर्म पर जगह-जगह घनी घास और कांटेदार पौधे उग आए हैं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि साफ-सफाई के अभाव में प्लेटफॉर्म जहरीले सांप और बिच्छुओं का बसेरा बनता जा रहा है। खासकर शाम और रात के समय यहां यात्रियों के बीच हमेशा डर का माहौल बना रहता है।
ग्रामीणों के अनुसार, इमली बीघा रेलवे हॉल्ट पर वर्ष 2004 के आसपास रेल विभाग द्वारा प्लेटफॉर्म और एक टिकट काउंटर का निर्माण कराया गया था। उस समय ग्रामीणों और आसपास के गांवों के लोगों में काफी खुशी थी कि स्थानीय स्तर पर ट्रेन पकड़ने की सुविधा उपलब्ध हो गई। धीरे-धीरे यह हॉल्ट आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण साधन बन गया। लेकिन रखरखाव और नियमित साफ-सफाई के अभाव में अब इसकी स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है।
टूटे प्लेटफॉर्म से ट्रेन चढ़ना-उतरना मुश्किल
हॉल्ट का प्लेटफॉर्म कई जगह से टूट चुका है। प्लेटफॉर्म की सतह खराब होने के कारण यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने के दौरान काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और दिव्यांग यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी होती है। ट्रेन के ठहराव के दौरान यात्रियों को टूटे हिस्सों और उगी हुई झाड़ियों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्लेटफॉर्म की मरम्मत और साफ-सफाई नहीं कराई गई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे हॉल्ट का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
पांच बैठका भी झाड़ियों से घिरे
यात्रियों के बैठने के लिए प्लेटफॉर्म पर बनाए गए करीब पांच बैठका भी बदहाल स्थिति में हैं। इन बैठकों के आसपास कांटेदार पौधे और झाड़ियां उग आई हैं। इसके कारण यात्रियों को बैठने के लिए उचित जगह नहीं मिलती। कई लोग ट्रेन के इंतजार में इधर-उधर खड़े रहने को मजबूर होते हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से साफ-सफाई नहीं होने के कारण झाड़ियां काफी बढ़ गई हैं। इन झाड़ियों के बीच जहरीले जीव-जंतुओं के छिपे होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार, आए दिन सांप और बिच्छू दिखाई देते हैं। रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
खराब पड़ा चापाकल, गर्मी में पानी के लिए भटकते हैं यात्री
इमली बीघा रेलवे हॉल्ट पर यात्रियों के लिए पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां लगा पुराना चापाकल कई वर्षों से खराब पड़ा है। लंबे समय से उपयोग में नहीं आने के कारण चापाकल के आसपास घास-फूस और भूसा तक उग आया है।

भीषण गर्मी के दिनों में यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी होती है। ट्रेन के इंतजार में घंटों रहने वाले यात्रियों को पीने के पानी के लिए आसपास के दुकानों या गांव की ओर जाना पड़ता है। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले लोगों को इससे काफी परेशानी होती है।
यात्रियों ने रेलवे विभाग से मांग की है कि खराब पड़े चापाकल की मरम्मत कराकर उसे चालू कराया जाए अथवा हॉल्ट पर पेयजल की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि यात्रियों को गर्मी के मौसम में पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़े।
कई ट्रेनों का होता है ठहराव
इमली बीघा रेलवे हॉल्ट पर कई महत्वपूर्ण पैसेंजर और मेमो ट्रेनों का ठहराव होता है। यहां राजगीर-तिलैया पैसेंजर ट्रेन के अलावा पटना-राजगीर मेमो और गया मेमो जैसी ट्रेनों से भी यात्री आवागमन करते हैं। इस कारण सुबह से लेकर शाम तक हॉल्ट पर यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है।
इमली बीघा गांव के अलावा आसपास के चंदौरा, सिहुली, सलेमपुर, सुपासंग, धमौली डीह, धमौली बाजार, दोसूत, देव बीघा, गोबरिया, गंजपर, कुतुबपुर, पैठना, गगनपुर, उफरौल समेत दर्जनों गांवों के लोग यहां से ट्रेन पकड़ने के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीणों के लिए यह हॉल्ट स्थानीय परिवहन का महत्वपूर्ण साधन है।
साफ-सफाई के अभाव में यात्रियों में डर
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे हॉल्ट पर नियमित रूप से सफाई नहीं होने के कारण प्लेटफॉर्म की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। घास और झाड़ियों के कारण यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर चलने में भी परेशानी होती है। कई जगह कांटेदार पौधे रास्ते में फैल गए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि झाड़ियों में जहरीले सांप और बिच्छू छिपे रहने की आशंका बनी रहती है। रात के समय ट्रेन पकड़ने आने वाले यात्रियों को विशेष रूप से सावधान रहना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ यात्रियों को सांप-बिच्छू के काटने की घटनाओं का भी सामना करना पड़ा है। ऐसे में प्लेटफॉर्म की नियमित सफाई कराना बेहद जरूरी है।
रेलवे फाटक नहीं होने से भी परेशानी
इमली बीघा रेलवे हॉल्ट के पास गांव की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर रेलवे फाटक नहीं होने की समस्या भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे लाइन पार कर गांव की ओर जाने वाले मार्ग पर फाटक की सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी होती है।
स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं, बच्चों, बुजुर्गों और स्थानीय ग्रामीणों को रेलवे लाइन पार करते समय काफी सतर्कता बरतनी पड़ती है। ट्रेनों की आवाजाही के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने रेलवे विभाग से यहां सुरक्षा के लिहाज से रेलवे फाटक या अन्य सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
ग्रामीणों ने रेलवे विभाग से की सुविधाएं बहाल करने की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों ने रेलवे विभाग से इमली बीघा रेलवे हॉल्ट की स्थिति में सुधार की मांग की है। लोगों का कहना है कि सबसे पहले प्लेटफॉर्म की साफ-सफाई कराकर उगी हुई घास, झाड़ियों और कांटेदार पौधों को हटाया जाए। इसके साथ ही टूटे प्लेटफॉर्म की मरम्मत कर यात्रियों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों ने प्लेटफॉर्म पर नियमित सफाई की व्यवस्था, खराब चापाकल को चालू कराने, यात्रियों के बैठने के स्थानों की सफाई तथा आवश्यकतानुसार अन्य यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके अलावा हॉल्ट के समीप मुख्य मार्ग पर रेलवे फाटक अथवा सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था किए जाने की भी मांग उठाई गई है।
लोगों का कहना है कि इमली बीघा रेलवे हॉल्ट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण यात्रा करते हैं। यदि रेलवे विभाग इस हॉल्ट की समस्याओं पर ध्यान देकर आवश्यक सुविधाएं बहाल कर दे तो आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। ग्रामीणों ने रेलवे के संबंधित अधिकारियों से जल्द स्थल का निरीक्षण कर समस्याओं का समाधान कराने की अपील की है।
