मां काली के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, 3200 वर्गफीट में साकार हुआ पहाड़ी गांव का दृश्य
पट खुलते ही पूजा पंडाल में लगी भक्तों की कतार, विधायक डॉ. सुनील कुमार ने की आरती; 150 साल पुरानी परंपरा के साथ सजी मां काली की भव्य दरबार
बिहारशरीफ, नालंदा। शारदीय नवरात्र की महासप्तमी के पावन अवसर पर बिहारशरीफ के ऐतिहासिक भैंसासुर काली चौराहा पर मां काली की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूजा पंडाल का पट खुलते ही भक्तों की कतार लग गई। श्रद्धालु मां काली के दर्शन कर अपने परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्थानीय भाजपा विधायक डॉ. सुनील कुमार ने मां काली की विधिवत आरती उतारी और समस्त देशवासियों तथा क्षेत्र के लोगों के कल्याण की मंगलकामना की।
3200 वर्गफीट में पहाड़ी और ग्रामीण जीवन की अनूठी झलक
इस वर्ष भैंसासुर का पूजा पंडाल अपनी अनूठी प्राकृतिक थीम के कारण शहर में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करीब 3200 वर्गफीट क्षेत्र में तैयार विशाल पंडाल में मां काली को पहाड़ की प्राकृतिक कंदराओं के बीच विराजमान दिखाया गया है। वहीं, पहाड़ की तराई में बसे गांवों की पारंपरिक संस्कृति, रहन-सहन और जीवनशैली को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
पंडाल में कृषि, बागवानी, गोपालन, जलस्रोत, सड़क, ग्रामीण विद्यालय और अस्पताल से जुड़े दृश्य सजीव रूप में उकेरे गए हैं। इसे वास्तविक और जीवंत स्वरूप देने के लिए 30 से अधिक मानव प्रतिमाओं के साथ दर्जनों पेड़-पौधों के मॉडल तैयार किए गए हैं। कारीगरों की टीम ने दिन-रात मेहनत कर इस अनूठी कलाकृति को आकार दिया है। पंडाल में धार्मिक आस्था के साथ ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक परिवेश की झलक भी देखने को मिल रही है।
विधायक ने कहा, मां के आशीर्वाद से मिली सेवा करने की शक्ति
पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि नवरात्र सनातन आस्था का महापर्व है, जिसमें मां दुर्गा और मां काली के विभिन्न स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। भैंसासुर की काली पूजा ऐतिहासिक है और यह लंबे समय से बिहारशरीफ के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही है।
उन्होंने कहा कि कई वर्षों से उन्हें इस पूजा पंडाल के उद्घाटन का सौभाग्य मिलता रहा है। माता और जनता के आशीर्वाद से ही उन्हें लगातार छठी बार बिहारशरीफ का विधायक बनने का अवसर मिला है।
150 वर्षों से स्थापित हो रही हैं मां काली
पूजा व्यवस्था से जुड़े गोपाल कृष्ण पांडे ने बताया कि भैंसासुर चौराहा पर मां काली की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा करीब 150 वर्षों से चली आ रही है। महासप्तमी को पट खुलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार, बच्चों और समाज की सुख-शांति एवं खुशहाली की कामना लेकर मां के दरबार में पहुंचे।
आकर्षक पंडाल, प्राकृतिक परिवेश और मां काली के अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। ऐतिहासिक परंपरा और भव्य सजावट के कारण भैंसासुर काली पूजा एक बार फिर बिहारशरीफ में श्रद्धा और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
