नालंदा की बावन बूटी हस्तकला देश की धरोहर, इसे बचाना और बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी : मंत्री श्रवण कुमार

0
Screenshot_20260615_094308_WhatsApp

बिहारशरीफ, संवाददाता। नालंदा की प्रसिद्ध बावन बूटी साड़ी को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने के बाद जिले के बुनकरों में खुशी की लहर है। इसी क्रम में बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं सूचना जनसंपर्क मंत्री तथा जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार बिहारशरीफ प्रखंड के बसवन बिगहा गांव पहुंचे और बावन बूटी हस्तकला से जुड़े बुनकरों से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी।

इस अवसर पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि नालंदा की बावन बूटी हस्तकला देश की अमूल्य धरोहर है। जीआई टैग मिलना नालंदा की पहचान और बुनकरों की वर्षों की मेहनत का सम्मान है। इससे अब नालंदा की बावन बूटी साड़ी देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान के साथ बाजार में पहुंचेगी और बुनकरों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पारंपरिक कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जीविका के माध्यम से विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में बावन बूटी के अंगवस्त्र का उपयोग कर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आयोजित ग्रामश्री मेलों में विशेष स्टॉल लगाकर इस कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि बावन बूटी की कारीगरी सदियों पुरानी विरासत है। प्रत्येक साड़ी में बुनकरों की कला, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान झलकती है। जीआई टैग मिलने से इस उत्पाद की नकल पर रोक लगेगी और असली उत्पाद को वैश्विक बाजार में पहचान मिलेगी। उन्होंने बुनकरों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार मार्केटिंग, डिजाइन विकास, प्रशिक्षण तथा आधुनिक तकनीक से जोड़ने में हर संभव सहायता प्रदान करेगी। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन उत्पादों की बिक्री बढ़ाकर बुनकरों की आय में वृद्धि की जाएगी।

श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार की हस्तकलाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं। इन्हें बचाना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। बसवन बिगहा और नेपुरा गांव के बुनकर बिहार का गौरव हैं और सरकार उनके कौशल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस कला को बढ़ावा देने और संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार आगे भी इस धरोहर के संरक्षण और विकास के लिए हर संभव सहयोग करती रहेगी।

कार्यक्रम में उपस्थित सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने कहा कि बावन बूटी कला से जुड़े बुनकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। सरकार की योजनाओं के माध्यम से उनके आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संसद में भी इस कला के विकास और बुनकरों के हितों की मजबूती से पैरवी की जाएगी।

इस अवसर पर लाखों देवी ने कहा कि बावन बूटी कला की शुरुआत पद्मश्री से सम्मानित स्वर्गीय कपिल देव कामत ने की थी। उनके अथक परिश्रम और समर्पण के कारण इस कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। जीआई टैग मिलने से बुनकरों का वर्षों पुराना सपना साकार हुआ है और इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर बावन बूटी हस्तकला को पहचान दिलाने में पद्मश्री स्वर्गीय कपिल देव कामत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी मेहनत और दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि आज बसवन बिगहा और नेपुरा गांव देशभर में अपनी विशिष्ट हस्तकला के लिए जाने जाते हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुनकर, महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्याएं, जिला प्रवक्ता गुलरेज अंसारी, डॉ. धनंजय कुमार, देव कुमार मंगलम, रिक्की कुमार, पुष्पराज पांडेय, सच्चिदानंद प्रसाद सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *