मघड़ा हादसे पर डॉ. दिलीप कुमार का दौरा, उच्चस्तरीय जांच और मुआवजे की मांग

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बिहारशरीफ (नालंदा)। मघड़ा स्थित शीतला माता मंदिर में 31 मार्च को हुई दर्दनाक घटना के बाद विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य व स्नातक अधिकार मंच के संयोजक डॉ. दिलीप कुमार ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इस हादसे में दम घुटने से आठ श्रद्धालु महिलाओं की मौत हो गई थी, जिससे पूरे जिले में शोक का माहौल है।

दौरे के दौरान प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह मंदिर अत्यंत पौराणिक है और यहां वर्षों से प्रत्येक मंगलवार को जल चढ़ाने और पूजा-अर्चना के लिए भारी भीड़ उमड़ती रही है। खासकर शीतलाष्टमी और चैत्र महीने के अंतिम मंगलवार को यहां जिले ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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डॉ. दिलीप कुमार ने कहा कि अत्यधिक भीड़ और गर्मी के कारण श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई, जिससे एक साथ अधिक संख्या में लोग मंदिर परिसर में प्रवेश कर गए और स्थिति अनियंत्रित हो गई। उन्होंने इसे एक दुखद संयोग बताते हुए कहा कि इस घटना के लिए किसी एक पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, हालांकि पूजा समिति द्वारा प्रशासन को समय रहते सूचना नहीं देना भी एक चूक रही।

उन्होंने यह भी बताया कि घटना वाले दिन महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम के कारण जिले का प्रशासनिक और पुलिस बल प्रोटोकॉल ड्यूटी में व्यस्त था, जिससे मंदिर परिसर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो पाई।

डॉ. दिलीप कुमार ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल थाना प्रभारी को निलंबित करना और पुजारियों को गिरफ्तार करना उचित कदम नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही ड्यूटी में लगे थे, ऐसे में सिर्फ निचले स्तर के कर्मियों पर कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है।

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उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक दोषियों की पहचान हो सके। साथ ही नालंदा जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों—बड़गांव सूर्य मंदिर, औंगारी सूर्य मंदिर, मां आशापुरी मंदिर, घोसरामा मां मनसा मंदिर, पिलिच्छ शीतला माता मंदिर और मघड़ा मंदिर—में भीड़ प्रबंधन के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने सुझाव दिया कि इन सभी मंदिरों का ट्रस्ट बनाकर उन्हें राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड से जोड़ा जाए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर हो सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

डॉ. दिलीप कुमार ने मृतकों के परिजनों को कम से कम 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि निर्दोष पुजारियों और निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा कर उसे वापस लिया जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

उन्होंने बताया कि इस घटना की जानकारी विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. तपन कुमार को भी दी गई है। आयोग की ओर से जल्द ही एक टीम गठित कर मामले की जांच कराई जाएगी।

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