राजगीर मलमास मेला 2026 में 3.82 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, मेला शांतिपूर्ण, सुरक्षित और ऐतिहासिक रूप से सफल रहा : डीएम व एसपी
बिहारशरीफ। राजकीय राजगीर मलमास मेला 2026 के सफल समापन के अवसर पर मंगलवार को न्यू एनआईसी सभागार में जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार एवं पुलिस अधीक्षक भारत सोनी की संयुक्त अध्यक्षता में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
जिला पदाधिकारी ने बताया कि अध्यात्म, आस्था और विरासत के अद्भुत संगम राजगीर में मलमास मेला का शुभारंभ 17 मई 2026 को ब्रह्मकुंड परिसर में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुआ था। मेले की तैयारियां फरवरी माह से ही शुरू कर दी गई थीं। जिला प्रशासन, पुलिस, पंडा समिति एवं स्थानीय संगठनों के साथ कई चरणों में बैठक और स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत डिजिटाइज्ड ले-आउट प्लान तैयार किया गया।
उन्होंने बताया कि 17 मई से 15 जून तक चले मेले में लगभग 3 करोड़ 82 लाख श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचे। बिहार के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, सिक्किम सहित नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए।

आवासन, स्वास्थ्य और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था
मेला क्षेत्र में 15 आवासन स्थलों पर 13.87 लाख श्रद्धालुओं ने अस्थायी आवास सुविधा का लाभ लिया। यहां कूलर, मिस्ट फैन, पेयजल, शौचालय, रोशनी एवं सीसीटीवी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 7 अस्थायी अस्पताल, 20 स्वास्थ्य शिविर, 377 चिकित्सक एवं पैरामेडिकल कर्मी, 16 एम्बुलेंस और एक आईसीयू की व्यवस्था की गई। पूरे मेले के दौरान 1,05,419 श्रद्धालुओं का उपचार किया गया, जबकि 256 मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया गया। गर्मी के कारण बेहोश हुए 3,376 श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान कर स्वस्थ किया गया।
खोया-पाया केंद्र बना सहारा
खोया-पाया केंद्र के माध्यम से 5,969 बिछड़े श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाया गया। इनमें 3,110 महिलाएं, 2,273 पुरुष और 585 बच्चे शामिल थे।
दिव्यांग और वृद्ध श्रद्धालुओं को विशेष सुविधा
आपदा मित्रों की मदद से 1,514 वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं को व्हीलचेयर के माध्यम से ब्रह्मकुंड तक पहुंचाकर स्नान कराया गया। आपदा प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के लिए 200 आपदा मित्र, एसडीआरएफ तथा स्काउट-गाइड की तैनाती की गई थी।
1200 दंडाधिकारी और 5000 पुलिस बल रहे तैनात
विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीन पालियों में लगभग 1,200 दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी तथा 5,000 पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई। पूरे मेला क्षेत्र में 426 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी गई।
सफाई और पेयजल व्यवस्था रही सराहनीय
मेला क्षेत्र में 656 सफाईकर्मी, 84 पर्यवेक्षक तथा 20 से अधिक वाहन प्रतिनियुक्त किए गए थे। प्रतिदिन एकत्रित ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया। श्रद्धालुओं के लिए 1,000 शौचालय, 300 नल वाले 30 प्याऊ, 125 स्टैंड पोस्ट, 20 नए चापाकल तथा 60 चापाकलों की मरम्मत कराई गई।

दीदी की रसोई से 1.35 करोड़ की आय
श्रद्धालुओं को मात्र 35 रुपये में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए 25 “दीदी की रसोई” संचालित की गईं। इसके माध्यम से जीविका समूहों को कुल 1.35 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
पूरे मेले के दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का अनुभव मिला।
शांतिपूर्ण और सुरक्षित रहा मेला
पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने बताया कि संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल, सीसीटीवी, ड्रोन सर्विलांस, ट्रैफिक प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावी व्यवस्था के कारण पूरा मेला शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में संपन्न हुआ।
अंत में जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने मलमास मेला के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले जिलेवासियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, स्वयंसेवकों और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।
