सांसद कौशलेंद्र कुमार ने लोकसभा में उठाया नालंदा विश्वविद्यालय का मुद्दा, विश्वविद्यालय को अधिक समावेशी बनाने, स्थानीय छात्रों व युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग

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रानी सिन्हा की रिपोर्ट, नालंदा।
नालंदा के लोकसभा सांसद कौशलेंद्र कुमार ने संसद में नियम 377 के तहत नालंदा विश्वविद्यालय का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने विश्वविद्यालय को अधिक समावेशी बनाने और स्थानीय छात्रों व युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग की।

सांसद ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय भारत के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक रहा है। केंद्र सरकार द्वारा स्थापित नए नालंदा विश्वविद्यालय के निर्माण में भारी धनराशि खर्च की गई है, वहीं बिहार सरकार ने इसके लिए मुफ्त में जमीन उपलब्ध कराई। इसके बावजूद स्थापना के 12 वर्ष बाद भी विश्वविद्यालय में कुल छात्रों की संख्या 500 से कम है और बिहार के छात्रों की संख्या 20 से भी कम है, जो चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के नाम पर समावेशी शिक्षा की उपेक्षा की जा रही है, जबकि शिक्षा व्यवस्था सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी होनी चाहिए। ऊंची फीस और भारतीय छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की कमी के कारण कई योग्य छात्र प्रवेश से वंचित रह जाते हैं।

सांसद कौशलेंद्र कुमार ने मांग की कि विदेश मंत्रालय के अधीन संचालित इस विश्वविद्यालय में स्थानीयता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए कोर्स शुरू किए जाएं, ताकि क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान में भी मदद मिल सके। साथ ही कर्मचारियों की भर्ती में नालंदा जिले के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए और भारतीय छात्रों के लिए अधिक छात्रवृत्ति की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय लोगों के आकर्षण का केंद्र है, इसलिए प्रतिदिन निर्धारित समय पर पर्यटकों को परिसर के कुछ हिस्सों में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए।

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