केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन निकाली गयी शोभा यात्रा :जैन धर्म के 24 में 22 तीर्थंकर बिहार व झारखंड में :सभी जीवों की रक्षा का संदेश देता है जैन धर्म :

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अनुमंडल संवाददाता, राजगीर, राजीव लोचन की रिपोर्ट…

राजगीर (नालंदा) : जैन श्वेताम्बर कोठी नौलखा मंदिर में 20वें तीर्थंकर भगवान श्री मुनिसुब्रत स्वामी जी का केवलज्ञान कल्याणक तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को शोभायात्रा निकाली गयी। नगर भ्रमण के दौरान सैंकड़ों श्रद्धालु नाचते गाते हुए नजर आये। नौलखा मंदिर में अट्ठारह पाप स्थानक पूजा का आयोजन हुआ। वहीं मुंबई के गायकों ने अपनी प्रस्तुति से सबों का मन मोहा। सबों ने अशोक भाई मेहता गुरुजी को नमन किया। मुनि दादा कल्याणक मंडल मुंबई के समीर भाई मेहता ने कहा कि भगवान श्री मुनिसुब्रत स्वामी का जन्म राजा सुमित्र की धर्मपत्नी रानी पद्मावती की रत्नकुक्षी से इसी पावन धरा पर हुआ था। भगवान का शरीर श्यामवर्ण का था। उनका लक्षण कछुआ है। भगवान के 18 गणधर थे।

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इनमें इन्द्र स्वामी प्रथम थे। कोमन मेहता ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से यहां का कण-कण पवित्र होकर पूरा परिसर भक्तिमय हो जाता है। हम सबों का सौभाग्य है कि जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में 22 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि बिहार एवं झारखंड में है। संस्था के अध्यक्ष शशिकांत नवलखा ने कहा कि तीर्थंकरों के जीवन चरित्र का यदि हम अनुशरण करें तो समस्त मानव जाति का कल्याण होगा। जियो और जीने दो के सिद्धांत को अपनाये तो विश्व में कहीं भी युद्ध की नौबत नहीं आये। सभी जगहों पर भाईचारा बना रहेगा। संस्था के सचिव रंजन कुमार जैन ने कहा कि जैन धर्म सबों को आपस में मिलजुल कर रहना सिखाता है। सभी जीवों की रक्षा करने का संदेश देता है। ट्रस्टी रणवीर कुमार जैन ने कहा कि ऐसे आयोजनों से राजगीर में भक्ति की धारा बहने लगती है। ट्रस्टी प्रमोद दुगड़ ने कहा कि राजगीर तीर्थ की पवित्र भूमि पर पधारे हुए समस्त श्रद्धालुओं का अभिनंदन है। सहायक प्रबंधक ज्ञानेन्द्र पांडेय ने कहा कि कल्याणक पूजा का आयोजन हर साल किया जाता है। भगवान की आराधना कर काफी सकून मिलता है। संस्था के कैशियर संजीव कुमार जैन ने कहा कि नौलखा मंदिर का निर्माण राजस्थान के कुशल कारीगरों के द्वारा किया गया है। 1954 में यह बनना शुरू हुआ था। इसमें प्रभु जी की प्रतिष्ठा 1961 में हुई थी। भगवान मुनि सुब्रत स्वामीजी भगवान श्रीराम के समकालीन थे। यहां पर हर साल लाखों की संख्या में तीर्थयात्री आते हैं। मंदिर की ऐसी विशेषता है कि इसके निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं हुआ है। इस मौके पर ज्ञानेन्द्र पांडेय, संजीव कुमार जैन, ट्रस्टी अंकित चौरड़िया, प्रतीक जैन, जिमी मेहता, प्रभुलाल संघवी, परेश संघवी, राजु भाई, नीलेश भाई, भाविन भाई, दीपेश भाई, पारस शाह, ललित शाह, निपुन शाह, डौली जैन, मानसी जैन, मधु बेन, गीता बेन, पुनम बेन, रमेश चन्द्र भूरा, राजीव दुगड़, सुशील कुमार जैन, सुखराज जैन सहित अन्य मौजूद थे।

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