बेलदारी गांव में अखंड कीर्तन को लेकर निकाली गई भव्य कलश शोभा यात्रा

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रानी सिन्हा, संवाददाता

नूरसराय, नालंदा। नूरसराय प्रखंड क्षेत्र के अंधना बेलदारी गांव स्थित देवी स्थान में आयोजित होने वाले 24 घंटे के अखंड कीर्तन को लेकर मंगलवार को ग्रामीण कन्याओं एवं महिलाओं द्वारा भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।

कलश शोभा यात्रा की शुरुआत नूरसराय प्रखंड कार्यालय के समीप स्थित मां दुर्गा मंदिर से की गई। श्रद्धालु महिलाओं ने फतुहां के त्रिवेणी घाट से लाए गए पवित्र गंगाजल को कलश में भरकर सिर पर धारण किया और शोभा यात्रा में सम्मिलित हुईं। यात्रा के दौरान “जय श्री राम” और “जय माता दी” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

कलश शोभा यात्रा मां दुर्गा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर अंधना मोड़, अंधना गांव, नया टोला, झामा गांव होते हुए अंततः अंधना बेलदारी गांव स्थित देवी स्थान पहुंचकर संपन्न हुई। शोभा यात्रा के समापन के पश्चात देवी स्थान परिसर में पुरोहित लवकुश पांडेय द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अखंड कीर्तन का विधिवत शुभारंभ कराया गया।

अखंड कीर्तन के आयोजन को लेकर गांव में पूरे 24 घंटे तक चूल्हा नहीं जला। सभी ग्रामीणों ने फलाहार ग्रहण किया और भक्तिभाव के साथ कीर्तन में भाग लिया। “हरे राम हरे राम, हरे कृष्ण हरे कृष्ण” की गूंज से अंधना बेलदारी गांव पूरी तरह भक्तिमय हो गया। हर आयु वर्ग के लोग कीर्तन की धुन में लीन नजर आए।

इस अवसर पर पुरोहित लवकुश पांडेय ने कलश शोभा यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलश में विद्यमान शीतलता और पवित्रता को अनादि काल से मातृशक्ति से जोड़ा गया है। नारी का हृदय दया, करुणा, ममता और सेवा भाव से परिपूर्ण होता है। उनमें क्षमाशीलता, गंभीरता और सहनशीलता अधिक पाई जाती है, इसी कारण धार्मिक अनुष्ठानों में देव शक्तियों को अपने सिर पर धारण करने का सौभाग्य महिलाओं को प्राप्त होता है।

उन्होंने हरे राम-हरे कृष्ण महामंत्र के महत्व को बताते हुए कहा कि ‘हरे’ शब्द भगवान की दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि ‘राम’ और ‘कृष्ण’ स्वयं भगवान के नाम हैं। इस मंत्र का जाप मन और आत्मा को शुद्ध करता है तथा ईश्वर से आत्मिक जुड़ाव स्थापित करता है।

कलश शोभा यात्रा एवं अखंड कीर्तन के सफल आयोजन में कपिल जमादार, सुरेश राम, भूषण जमादार, बासुदेव जमादार, डोमन जमादार, बिनोद जमादार सहित अन्य ग्रामीणों की भूमिका सराहनीय रही।

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