पूर्व मंत्री श्रवण कुमार के व्यक्तित्व और कार्यों की झलक
बिहार की राजनीति में श्रवण कुमार एक ऐसे जननेता के रूप में जाने जाते हैं, जिनकी पहचान सेवा, समर्पण और सादगी से जुड़ी रही है। नालंदा की धरती से निकलकर उन्होंने पूरे प्रदेश में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है।
उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं। तीन दशक से अधिक समय से वे हर राजनीतिक उतार-चढ़ाव में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं। जेपी आंदोलन से लेकर समता पार्टी के गठन तक, उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
राजनीतिक सफर में उनकी एक बड़ी उपलब्धि यह है कि वे 1995 से नालंदा विधानसभा क्षेत्र से लगातार आठ बार विधायक चुने गए हैं। यह उनके प्रति जनता के अटूट विश्वास को दर्शाता है, जो बहुत कम नेताओं को प्राप्त होता है।

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वे खुद को हमेशा जमीन से जुड़ा नेता मानते हैं और महान समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों को अपना मार्गदर्शक बताते हैं। उनकी राजनीति सादगी, ईमानदारी और जनसेवा पर आधारित रही है। वे लगातार गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनके समाधान के लिए प्रयास करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “मंत्री जी ने कभी झूठे वादे नहीं किए और न ही करते हैं।”
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का प्रयास किया। ग्रामीण विकास मंत्री रहते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बिहार के लिए छह लाख आवास की मांग की और इस संबंध में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को मांग पत्र भी सौंपा। साथ ही, इंदिरा आवास योजना के अधूरे मकानों को पूरा कराने के लिए भी उन्होंने अतिरिक्त राशि की मांग उठाई।
मजदूरों और किसानों के हित में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहल की। मनरेगा में मजदूरी दर बढ़ाने की मांग उठाई और किसानों की निजी जमीन पर कृषि कार्यों को मनरेगा से जोड़ने का प्रस्ताव रखा, ताकि उन्हें सीधे लाभ मिल सके।
इसके अलावा, उन्होंने पंचायत सरकार भवन, आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सुरक्षा के लिए मनरेगा के तहत चारदीवारी निर्माण का सुझाव दिया। उनके नेतृत्व में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और रोजगार जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय कार्य हुए, जिसकी सराहना व्यापक रूप से की जाती है।
जब-जब श्रवण कुमार मंत्री बने, नालंदा जिले में उत्सव का माहौल देखा गया। नूरसराय से लेकर उनके पैतृक गांव तक लोगों ने इसे अपनी खुशी और सम्मान का प्रतीक माना—गुलाल उड़ाए गए, मिठाइयां बांटी गईं।
कुल मिलाकर, श्रवण कुमार जैसे नेता बिहार की राजनीति की अमूल्य पूंजी माने जाते हैं, जो सत्ता को सेवा का माध्यम मानते हुए जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
