राजगीर में ‘नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल’ का भव्य आगाज, साहित्य और तकनीक के संगम पर हुई चर्चा
शंकर कुमार सिन्हा की रिपोर्ट,
राजगीर (नालंदा)। ऐतिहासिक और ज्ञान की धरती राजगीर में गुरुवार को तीन दिवसीय नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल का भव्य शुभारंभ हुआ। 12 से 14 मार्च तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का आयोजन अमात्या फाउंडेशन के तत्वावधान में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बिहार की समृद्ध बौद्धिक परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना तथा साहित्य, संस्कृति और आधुनिक विचारों के बीच संवाद स्थापित करना है।
दीप प्रज्वलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम से शुरुआत
महोत्सव का उद्घाटन मुख्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार मनोज भावनी, गांधीवादी विचारक बलराज सिंह, कवयित्री कविता शर्मा, लेखिका हमा जैन, प्रोफेसर डॉ. लालदेव सिंह और डॉ. नीना वर्मा सहित कई प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में नालंदा विद्या मंदिर के बच्चों द्वारा प्रस्तुत स्वागत नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया और पूरे परिसर को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।

“साहित्य संवेदना देता है, डेटा सूचना”
ऑस्ट्रेलिया से आए आईटी विशेषज्ञ और व्यवसायी प्रवीण कुमार ने तकनीक और साहित्य के अंतर्संबंधों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि “डेटा हमें सूचनाएँ देता है, जबकि साहित्य हमें संवेदना प्रदान करता है। आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा और साहित्य के संगम का बेहतरीन उदाहरण बन चुका है।”
उन्होंने बिहार की धरती के महान रचनाकारों को याद करते हुए रामधारी सिंह दिनकर और फनिश्वर नाथ ‘रेनू’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर ने अपनी लेखनी से समाज में ऊर्जा भरी, जबकि रेणु ने मिट्टी की पीड़ा को शब्दों में जीवंत किया।
युवाओं से नवाचार का आह्वान
नालंदा इंटरनेशनल स्कूल की निदेशक वैशाली सेता ने स्वागत भाषण में कहा कि इस तरह के आयोजन बिहार की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अन्य वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे केवल इतिहास पढ़ने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार और प्रगति से जुड़ा नया साहित्य भी रचें। वक्ताओं का मानना था कि राजगीर जैसी ऐतिहासिक भूमि पर ऐसे आयोजन युवाओं को बौद्धिक विमर्श की नई दिशा देंगे।
तीन दिनों तक चलेगा वैचारिक मंथन
महोत्सव के आगामी सत्रों में देश-विदेश से आए लेखक, पत्रकार और विचारक विभिन्न समकालीन विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। गुरुवार के सत्र का सफल मंच संचालन शैलेश कुमार ने किया।
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन से उम्मीद जताई जा रही है कि यह न केवल साहित्य प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, बल्कि शांति, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के संदेश को भी व्यापक स्तर पर प्रसारित करेगा।
