बागवानी फसलों में कीट प्रबंधन, मूल्य संवर्धन एवं उद्यान योजनाओं पर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित
नालंदा, 19 अगस्त 2026। आत्मा, नालंदा के तत्वावधान में बुधवार को आत्मा सभागार में “बागवानी फसलों में कीट प्रबंधन, मूल्य संवर्धन एवं उद्यान विभाग की योजनाएँ” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक, आत्मा, नालंदा की अध्यक्षता में दीप प्रज्वलित कर किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग, आत्मा, उद्यान विभाग, पौधा संरक्षण विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र तथा नूरसराय स्थित उद्यान महाविद्यालय के वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आत्मा, नालंदा के उप परियोजना निदेशक धनंजय कुमार सिंह ने आत्मा द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादन के बाद उचित प्रबंधन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ना भी जरूरी है।
उन्होंने किसानों को आत्मा के माध्यम से संचालित प्रशिक्षण, कृषक भ्रमण, किसान-वैज्ञानिक संवाद, कौशल विकास सहित अन्य गतिविधियों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बागवानी फसलों में आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम क्षेत्रफल में भी बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उत्पादन के साथ-साथ फसल के मूल्य संवर्धन पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
फलों एवं सब्जियों के मूल्य संवर्धन की दी जानकारी
नूरसराय स्थित उद्यान महाविद्यालय के वैज्ञानिक वीरबहादुर सिंह ने बागवानी फसलों में मूल्य संवर्धन (Value Addition) विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फलों एवं सब्जियों को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उनका प्रसंस्करण कर विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इससे किसानों को उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकता है और फसल के खराब होने से होने वाली क्षति को भी कम किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को फलों एवं सब्जियों की ग्रेडिंग, पैकेजिंग, प्रसंस्करण, भंडारण तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की तकनीक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि व्यवस्था में उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन को अपनाना समय की आवश्यकता है।
समेकित कीट प्रबंधन पर किया जागरूक
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक उदय प्रताप नारायण ने बागवानी फसलों में समेकित कीट प्रबंधन (IPM) पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों की पहचान, उनके जीवन चक्र तथा फसलों को होने वाले नुकसान की जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बिना आवश्यकता रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। खेत में कीटों की संख्या आर्थिक क्षति स्तर तक पहुंचने पर ही आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने जैविक एवं यांत्रिक नियंत्रण, फेरोमोन ट्रैप, पीला चिपचिपा ट्रैप सहित अन्य वैज्ञानिक विधियों के उपयोग की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशक का सही मात्रा एवं उचित समय पर प्रयोग किया जाना चाहिए, ताकि फसल की सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
उद्यान विभाग की योजनाओं से कराया अवगत
जिला उद्यान पदाधिकारी, नालंदा ने किसानों को उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए फलदार पौधों, सब्जी, मसाला, फूल, संरक्षित खेती, बागवानी विकास सहित विभिन्न उद्यानिकी गतिविधियों के लिए विभाग द्वारा योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की कि पात्रता के अनुसार विभागीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों से संपर्क करें और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करें। उन्होंने बागवानी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक अपनाकर उत्पादन एवं किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।
पौधा संरक्षण की तकनीकों एवं योजनाओं की जानकारी
सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण वरुण कुमार ने पौधा संरक्षण विभाग की योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण फसल उत्पादन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज एवं पौध सामग्री के उपयोग, रोग एवं कीटों की समय पर पहचान तथा वैज्ञानिक पौधा संरक्षण उपाय अपनाने के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि फसल में रोग या कीट दिखाई देने पर किसानों को विशेषज्ञों एवं कृषि विभाग के तकनीकी कर्मियों से सलाह लेकर ही पौधा संरक्षण दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही सुरक्षित एवं संतुलित कीटनाशी उपयोग, निर्धारित मात्रा, उचित समय तथा छिड़काव के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी।
ATM एवं BTM की रही सक्रिय सहभागिता
प्रशिक्षण कार्यक्रम में आत्मा के ATM एवं BTM सहित संबंधित प्रखंडों के तकनीकी कर्मियों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की। इस दौरान किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी पंचायत एवं ग्राम स्तर तक पहुंचाने तथा प्रशिक्षण में बताई गई वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों के खेतों तक पहुंचाने में ATM एवं BTM की भूमिका पर चर्चा की गई।
अधिकारियों ने कहा कि ATM एवं BTM कृषि विभाग और किसानों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। इनके माध्यम से किसानों की समस्याओं को संकलित कर वैज्ञानिकों एवं संबंधित विभागीय पदाधिकारियों तक पहुंचाया जा सकता है तथा वैज्ञानिक सलाह को किसानों के खेतों तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने बागवानी फसलों में कीट प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, पौधा संरक्षण एवं विभागीय योजनाओं से संबंधित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की। किसानों एवं कर्मियों ने वैज्ञानिकों के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं एवं समस्याएं रखीं, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान करते हुए आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए।
कार्यक्रम के अंत में आत्मा, नालंदा के उप परियोजना निदेशक धनंजय कुमार सिंह ने सभी वैज्ञानिकों, पदाधिकारियों, ATM, BTM एवं प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना तथा बागवानी फसलों से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए उत्पादन से लेकर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन तक की जानकारी उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम का समापन किसानों एवं विभागीय कर्मियों से प्राप्त सुझावों के साथ हुआ। साथ ही भविष्य में भी किसानों के लिए इस प्रकार के तकनीकी एवं उपयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया।
