मलमास मेला के पहले दिन ही उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, 2015 में लगाया गया था मेला में थियेटर पर पाबंदी

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मलमास में तैंतीस कोटि देवी-देवता होते हैं राजगीर में विराजमान

राजगीर (नालंदा ) : राजगीर में आयोजित होने वाला प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं धार्मिक मलमास मेला इस वर्ष 17 मई से शुरू होगा। मेला शुरू होने में अब महज 20 दिन शेष रह गए हैं। इस मेले का अत्यधिक धार्मिक महत्व है, जिसके चलते देशभर से साधु-संत और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मलमास के दौरान तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का वास राजगीर में होता है। इस अवधि में यहां के विभिन्न कुंडों में स्नान करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

थियेटर पर पाबंदी की उठी मांग

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने मेला को पूरी तरह धार्मिक स्वरूप देने की मांग की है। उनका कहना है कि मेला में लगने वाले थियेटर में अश्लील प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। इससे महिलाओं और साधु-संतों को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।

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गौरतलब है कि वर्ष 2015 में साधु-संतों के विरोध के बाद प्रशासन ने मेला में थियेटर पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, उस समय ‘जागरण’ के नाम पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन उनकी प्रकृति थियेटर जैसी ही रही।

लोगों की मांग है कि इस बार प्रशासन सख्ती से थियेटर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए और इसके स्थान पर भजन-कीर्तन जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कराए।

पहले दिन ही जुटेगी भारी भीड़

अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री सह पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र उपाध्याय के अनुसार, इस वर्ष मेला 17 मई (रविवार) से शुरू हो रहा है, जिससे पहले ही दिन भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

मेला के दौरान तीन प्रमुख शाही स्नान होंगे:

  • 27 मई (एकादशी) – पहला शाही स्नान
  • 31 मई (पूर्णिमा, रविवार) – दूसरा शाही स्नान
  • 11 जून (एकादशी) – तीसरा शाही स्नान

इसके अलावा 25 मई (गंगा दशहरा) सहित अन्य शुभ तिथियों पर भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

सिंगल श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की मांग

मलमास मेला में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, जिनमें कई ऐसे भी होते हैं जो अकेले बैग लेकर स्नान करने पहुंचते हैं। ऐसे श्रद्धालुओं के लिए सामान सुरक्षित रखने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

कई बार उनका सामान गुम हो जाता है, जिससे उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस बार सिंगल श्रद्धालुओं के लिए बैग और चप्पल रखने की विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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