गणित में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर डैफोडिल पब्लिक स्कूल में विशेष कार्यशाला
बिहारशरीफ। स्थानीय मंगलास्थान स्थित डैफोडिल पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया से जोड़ने तथा गणित विषय को आधुनिक और तकनीक आधारित दृष्टिकोण से समझाने के उद्देश्य से कक्षा 7वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए ‘गणित में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग’ विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न रचनात्मक एवं शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की उपयोगिता और संभावनाओं से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के चेयरमैन रंजीत प्रसाद सिंह, प्राचार्य डॉ. रवि चंद कुमार, संजय कुमार, ज्योति मेहता, अजीत कुमार, जितेंद्र प्रसाद सिन्हा, सुमंत कुमार, दीपक कुमार, अतुल अभिलाष, अखिलेश प्रसाद एवं मनोज कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साह, जिज्ञासा और रचनात्मकता के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। उन्हें बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार गणितीय समस्याओं के समाधान, डेटा विश्लेषण, पैटर्न पहचान, गणना, भविष्यवाणी और सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं रोचक बनाने में सहायक हो रहा है।
विद्यार्थियों ने गणित एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के आत्मविश्वासपूर्वक उत्तर देकर अपनी तार्किक क्षमता और तकनीकी समझ का परिचय दिया। वहीं, भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वर्तमान एवं भविष्य के प्रभाव, गणितीय शिक्षा में इसकी भूमिका तथा इसके जिम्मेदार उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए।
प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और नवाचार को तकनीक के साथ जोड़ते हुए विभिन्न मॉडल एवं प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वर्किंग मॉडल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने प्रदर्शित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस प्रकार गणितीय गणना, पैटर्न और डेटा को समझने के साथ-साथ विभिन्न समस्याओं के समाधान में उपयोगी साबित हो सकती है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रोजेक्ट ने यह दर्शाया कि आधुनिक तकनीक को शिक्षा से जोड़कर सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रचनात्मक और व्यावहारिक बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में रवि रंजन भारती, प्रशांत कुमार, सत्यम, कुमारी अनुजा, तलत आफरीन, बिपिन, तेजस्वी एवं विद्यानंदन सिन्हा का सराहनीय योगदान रहा।
