नर्सिंग कॉलेज में 120 छात्रों का हंगामा, परीक्षा सेंटर के नाम पर लाखों रुपये वसूलने का आरोप

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सिलाव के एसए इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में छात्रों ने किया प्रदर्शन, बस, योग्य फैकल्टी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की मांग

सिलाव। पटना के बाद अब नालंदा में भी नर्सिंग छात्रों के हंगामे का मामला सामने आया है। सिलाव प्रखंड के भुई रोड स्थित सिकंदरा गांव में संचालित एसए इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में मंगलवार को सत्र 2023-27 और 2024-28 के करीब 120 छात्र-छात्राओं ने कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा किया।

छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा में सेंटर मैनेज कराने के नाम पर निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त प्रत्येक छात्र से डेढ़ से दो लाख रुपये तक लिए गए। छात्रों का आरोप है कि इसके बावजूद परीक्षा सेंटर मैनेज नहीं हुआ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी परीक्षा में फेल हो गए। इसी को लेकर छात्रों में आक्रोश है।

तीन दिन पहले भी हुई थी बातचीत

छात्रों ने बताया कि करीब तीन दिन पहले भी थानाध्यक्ष की मौजूदगी में कॉलेज प्रबंधन से बातचीत हुई थी, लेकिन मामले का कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद मंगलवार को छात्रों ने बीडीओ और सीओ को आवेदन देकर कॉलेज निदेशक को बुलाने की मांग की। आवेदन के बाद कॉलेज परिसर में छात्रों ने प्रदर्शन और हंगामा शुरू कर दिया।

छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें बस सुविधा उपलब्ध कराने, योग्य फैकल्टी से पढ़ाई कराने, क्लिनिकल एवं प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी कराने तथा सेंटर मैनेज कराने के नाम पर कथित रूप से ली गई राशि वापस करने की मांग प्रमुख रही।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुई वार्ता

हंगामे की सूचना मिलने के बाद बीडीओ, थानाध्यक्ष और कॉलेज निदेशक मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। काफी देर तक चली वार्ता के बाद कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों की मांगों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्रों का हंगामा शांत हुआ।

हालांकि, कॉलेज निदेशक ने छात्रों द्वारा लगाए गए परीक्षा सेंटर मैनेज कराने के नाम पर पैसे लेने के आरोप को गलत बताया। उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए छात्रों की अन्य मांगों पर विचार करने की बात कही।

मामले को लेकर छात्रों के आरोप और कॉलेज प्रबंधन के पक्ष में विरोधाभास सामने आया है। अब देखना होगा कि छात्रों द्वारा लगाए गए आर्थिक अनियमितता के आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है और उन्हें उनकी मांगों के अनुरूप राहत मिलती है या नहीं।

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