गैस की ज्यादा खपत वाले परिवार को लेना पड़ रहा कोयला-लकड़ी का सहारा ,कोयला व लकड़ी की बढ़ रही डिमांड
राजगीर(नालंदा)। उपभोक्ताओं को गैस लेने के लिए 25 दिनों का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस कारण जिस परिवार में अधिक संख्या है उनको अब खाना बनाने के लिए गैस के अलावा कोयला-लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। इस कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटन स्थल राजगीर में इन दीनों शादी विवाह को लेकर गैस मिलने के आसार कम होता देख लोग कोयला व लकड़ी का सहारा ले रहे हैं।
इसका सीधा असर स्थानीय बाजार और आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। गैस की कमी के चलते अब लोग एक बार फिर कोयला और लकड़ी की ओर रुख करने लगे हैं। शादी-विवाह, तिलकोत्सव, जनेऊ और रिसेप्शन जैसे मांगलिक आयोजनों में पहले जहां रसोई गैस का व्यापक उपयोग होने लगा था, वहीं अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। गैस की अनुपलब्धता के कारण आयोजक फिर से कोयले पर ही भोजन और नाश्ते की सामग्री तैयार करवा रहे हैं। इससे कोयले और लकड़ी की मांग में अचानक तेजी आ गई है। बाजार में कोयले की कीमत भी बढ़ गई है। मौजूदा समय में कोयला 800 रुपये प्रति मन(40 किलो) बिक रहा है, जबकि कुछ समय पहले इसकी कीमत 600 रुपये प्रति मन थी। इसी तरह लकड़ी की कीमत भी 350 रुपये प्रति मन (40 किलो) तक पहुंच गई है। कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद मांग में कोई कमी नहीं आई है।
स्थानीय कोयला दुकानदार निर्मल द्विवेदी के अनुसार लगन के इस मौसम में कोयला और लकड़ी की बिक्री लगातार बढ़ रही है। स्थिति यह है कि दुकानदारों को हर 10-15 दिन पर नया स्टॉक मंगवाना पड़ रहा है। राजगीर में कोयला की तीन दुकान हैं। एक शहर के गिरियक रोड चौराहा पर, तो दूसरा बस स्टैंड के समीप छबिलापुर रोड और तीसरा सीवरेज रोड में है। तीनों प्रमुख दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ देखी जाती है। उधर रसोई गैस उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर की बुकिंग अब 25 दिनों के अंतराल पर ही पूरी हो पा रही है, जिससे घरेलू रसोई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कुल मिलाकर गैस संकट ने राजगीर में एक बार फिर पुराने समय की याद ताजा कर दी है, जब कोयला और लकड़ी ही रसोई के मुख्य साधन हुआ करते थे।
