कृषि यंत्रीकरण सह किसान मेला का शुभारंभ, आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए किसानों को किया गया प्रेरित

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शंकर कुमार सिन्हा की रिपोर्ट

बिहारशरीफ (नालंदा)। श्रम कल्याण मैदान में सोमवार को दो दिवसीय जिला कृषि यंत्रीकरण सह किसान मेला 2025-26 का आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों और नई कृषि तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और कृषि यंत्रीकरण को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से खेती की लागत कम होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है।

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उन्होंने किसानों और कृषि विभाग के पदाधिकारियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इनमें किसानों को प्रति यूनिट लागत और आय का आकलन करने, मक्को (Makoo) की खेती को बढ़ावा देने, हाई वैल्यू क्रॉप की खेती को प्रोत्साहित करने, भूमि की मिट्टी की जांच कराने तथा फूड प्रोसेसिंग पर विशेष ध्यान देने की बात कही। साथ ही किसानों को अपनी कुल जमीन का 80 प्रतिशत भाग पारंपरिक फसलों और 20 प्रतिशत भाग हाई वैल्यू क्रॉप की खेती के लिए उपयोग करने की सलाह दी।

जिलाधिकारी ने नूरसराय को कृषि अभियंत्रण का हब बनाने, रेड लेडी पपीता और जी-9 केला की खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों की सफलता की कहानियों पर आधारित वार्षिक पत्रिका और कृषि विभाग की योजनाओं से संबंधित बुकलेट प्रकाशित करने का भी सुझाव दिया।

इस मौके पर उप विकास आयुक्त ने भी किसानों और कृषि विभाग के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, मड़ुआ और रागी के उत्पादन और प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचाया जाए तथा प्रसार कर्मी ग्राम स्तर तक किसानों को योजनाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं।

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कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी ने मंच पर उपस्थित जिलाधिकारी, उप विकास आयुक्त, अन्य पदाधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और दूर-दराज से आए किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि यह मेला किसानों को आधुनिक तकनीक, नई कृषि पद्धतियों और उन्नत कृषि यंत्रों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच है।

उन्होंने बताया कि मेले में विभिन्न कंपनियों और विभागों द्वारा ट्रैक्टर, पावर टिलर, रीपर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज मशीन, ड्रोन तकनीक सहित कई आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रदर्शन किया जा रहा है, ताकि किसान इन तकनीकों को समझकर अपनी खेती में अपनाएं।

जिला कृषि पदाधिकारी ने कृषि विभाग की प्रमुख योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राज्य योजना के तहत खरीफ और रबी मौसम में धान, गेहूं, दलहन, तेलहन और मोटे अनाज के 29283.18 क्विंटल अनुदानित बीज जिले के 92602 किसानों के बीच वितरित किए गए हैं।

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उन्होंने बताया कि जैविक कॉरिडोर के तहत जिले के 12 प्रखंडों में 2000 एकड़ क्षेत्र में 2117 किसान जैविक खेती कर रहे हैं। वहीं सरमेरा में समेकित कृषि अनुसंधान एवं कृषक समृद्धि केंद्र की स्थापना की जा रही है, जिसका 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके बनने के बाद नालंदा सहित आसपास के जिलों के किसानों को कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, वर्मी कंपोस्ट और मशरूम उत्पादन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत जिले के 1,76,688 किसानों को कुल 35.34 करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई है। कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 6.03 करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ, जिसमें से 2.75 करोड़ रुपये के कृषि यंत्र 1233 किसानों द्वारा उठाए गए हैं। फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों पर सरकार द्वारा 75 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।

इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11236 मृदा नमूनों की जांच कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं। वहीं जिले के 15 प्रखंडों में 750 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है, जिससे 1875 किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त, प्रशिक्षु सहायक समाहर्ता, विभिन्न कृषि वैज्ञानिकों तथा अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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