वैज्ञानिक शोध तभी सार्थक है, जब मरीजों को मिले सीधा उपचार में लाभ : डॉ. गगन गुंजन

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सीसीडीएस सम्मेलन में डायबिटीज-हृदय रोग के नये शोध और उपचार पर हुआ मंथन

अनुमंडल संवाददाता, राजगीर। राजीव लोचन की रिपोर्ट, राजगीर(नालंदा)। क्लिनिकल कार्डियो डायबिटिक सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीसीडीएस) के बिहार-झारखंड चैप्टर के 10वें वार्षिक सम्मेलन के तीसरे दिन रविवार को डायबिटीज विज्ञान को रोजमर्रा के नैदानिक ज्ञान में बदलना विषय पर चर्चा करते हुए डॉ. गगन गुंजन ने कहा कि वैज्ञानिक शोध तभी सार्थक है जब उसका लाभ सीधे मरीजों के उपचार में दिखाई दे। इससे पहले वैज्ञानिक सत्र, पोस्टर प्रस्तुति, कार्यशालाएं और क्विज़ प्रतियोगिता हुई। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आये विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मधुमेह, हृदय रोग और उससे जुड़ी जटिलताओं पर नवीन शोध, उपचार पद्धतियों और व्यावहारिक अनुभव साझा किया। पीजीटी पोस्टर सेशन और क्विज सत्र का संचालन डॉ. निक सिंघल ने किया। इस सत्र में युवा चिकित्सकों और शोधार्थियों ने मधुमेह एवं हृदय रोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए। पोस्टर सत्र में डॉ. अरिजीत सामंत, डॉ. अनुपम प्रकाश और डॉ. रमेश अग्रवाल ने ‘पोर्टल हाइपरटेंशन और कार्डियक डिसफंक्शन नये दृष्टिकोण’ विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि लिवर और हृदय से जुड़ी बीमारियों के बीच संबंधों को समझना उपचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं डॉ. सौम्या सेनगुप्ता ने डायबिटीज के मरीजों में चारकोट फुट का प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस जटिल स्थिति में सही समय पर निदान और संतुलित उपचार अत्यंत आवश्यक है। डॉ. अनीश चौधरी ने रेडियोलॉजी और डायबिटीज़ की जटिलताओं में इसके निहितार्थ विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक इमेजिंग तकनीकें डायबिटीज़ से उत्पन्न जटिलताओं की पहचान में काफी सहायक साबित हो रही है। वहीं डॉ. अत्रि गंगोपाध्याय ने ‘डायबिटीज़ में पल्मोनरी फंक्शन टेस्टिंग का महत्व’ विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि मधुमेह का प्रभाव केवल हृदय या किडनी तक सीमित नहीं है, बल्कि फेफड़ों की कार्यक्षमता पर भी इसका असर पड़ सकता है। डॉ. उज्ज्वल रॉय ने डायबिटीज़ न्यूरोपैथी और उससे मिलते-जुलते अन्य रोगों की पहचान में न्यूरोमस्कुलर अल्ट्रासाउंड की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह तकनीक रोग की सटीक पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वहीं डॉ. पंकज हंस, डॉ. संजीव कुमार और डॉ. विकास सिंह ने लक्षण-रहित कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) की जांच की आवश्यकता और उसके प्रबंधन पर विचार साझा किया। डॉ. वरुण कुमार ने वीटी और एसीएस का प्रबंधन केस आधारित दृष्टिकोण विषय पर चिकित्सकीय चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की। इसके बाद मोटापा पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. आनंद देव और डॉ सुधाकर मिश्रा ने मोटापे के बढ़ते खतरे और उससे बचाव के उपायों पर जानकारी दी। सम्मेलन में आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और नई दवाओं पर भी चर्चा हुई। डॉ. पंकज हंस ने फिनरेनोनेदय और गुर्दे की सुरक्षा के लिए एक रोग-संशोधक चिकित्सा विषय पर अपने विचार रखे। वहीं डॉ. विकास सिंह ने बताया कि एचएफ एलवीईएफ-40 प्रतिशत के मरीजों में फिनरेनोने की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। सभी एमआरए दवाएं समान प्रभाव नहीं देती है। वाराणसी के डॉ. एके सिंह ने बुजुर्गों में डायबिटीज़ प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वृद्ध मरीजों के इलाज में दवाओं के साथ जीवनशैली में सुधार भी आवश्यक है। वहीं डॉ. एके विरमानी, डॉ. अरविंदा जगदीश और डॉ. एम. हयात ने आधुनिक तकनीकों जैसे वेयरेबल्स, मोबाइल एप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से हाइपरटेंशन के मरीजों की देखभाल में हो रहे बदलावों पर चर्चा की। डॉ. धनवंतरी तिवारी और डॉ. अभिषेक पात्रा ने मोटापे के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों के दौर में मोटापा एक बड़ी चुनौती बन चुका है। वहीं डॉ. एनसी सिंघल, डॉ. सुमित वर्मा और डॉ. सुजीत कुमार ने क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस में डायबिटीज के नए पहलुओं और कार्डियो-रीनल मेटाबॉलिक केयर से जुड़े व्यावहारिक सवालों पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान विभिन्न कार्यशालाओं का भी आयोजन किया गया। इसमें डॉ. आरके मोदी और उनकी टीम ने व्यायाम संबंधी गाइडलाइंस पर आधारित वर्कशॉप कराई। डॉ. आनंद देव की टीम ने मोटापा प्रबंधन पर प्रदर्शन किया। जबकि डॉ. अजय सिन्हा और उनकी टीम ने ईको जांच की उपयोगिता पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम के अंत में क्विज़ प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें डॉ. सुधीर कुमार और डॉ. संजीव कुमार ने क्विज़ मास्टर की भूमिका निभाई। इसके बाद पोस्टर सेशन के विजेताओं और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण और समापन समारोह के साथ तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन हुआ। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के वैज्ञानिक सम्मेलन चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा ज्ञान से अपडेट रखने के साथ-साथ बेहतर उपचार पद्धति विकसित करने में सहायक होते हैं। कार्यक्रम में डॉ श्यामनारायण प्रसाद, डॉ. सुजीत कुमार, डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ गगन गूंजन, डॉ शंखा सेन, डॉ शारदा रंजन, डॉ. बीके सिंह सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक और मेडिकल विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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