अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बराबरी के अधिकार के लिए जनआंदोलन जरूरी: राजकुमार भारत

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प्रेम सिंघानिया की रिपोर्ट,

नालंदा । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सर्वोदय नेता राजकुमार भारत ने महिलाओं से सभी क्षेत्रों में एकजुट होकर बराबरी के अधिकार के लिए जनआंदोलन चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति न्याय, साहस, संवेदनशीलता और संघर्ष की प्रतीक है, जो समाज में समानता की नई दिशा तय करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

राजकुमार भारत ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने हक के लिए किसी से भीख मांगने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें स्वतंत्र, स्वावलंबी और आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक रूप से मजबूत बनकर अपने अधिकार हासिल करने होंगे। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को अपने आत्मसम्मान, सामाजिक सुरक्षा और समान अधिकारों के लिए स्वयं मजबूत निर्णय लेने होंगे।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है, लेकिन यह भी जरूरी है कि समाज यह आत्ममंथन करे कि बाकी पूरे साल महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए क्या किया जाता है। आज भी समाज के कई हिस्सों में महिलाओं को घर, कार्यस्थल और सामाजिक जीवन में भेदभाव, हिंसा और दबाव का सामना करना पड़ता है। मानव तस्करी, जबरन देह व्यापार, घरेलू हिंसा और असमान अवसर जैसी समस्याएं आज भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि केवल उत्सव मनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर दिन महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष और एकजुटता जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से युवतियों, किसान-मजदूर परिवारों की बेटियों, छोटे दुकानदारों और कामगार वर्ग की महिलाओं को व्यवस्था परिवर्तन की सबसे मजबूत उम्मीद बताया।

राजकुमार भारत ने सभी से संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान, न्याय और बराबरी के अधिकार की लड़ाई केवल एक दिन की नहीं बल्कि हर दिन की प्रतिबद्धता होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने समाज में प्रेम, सत्य और मानवता के मूल्यों को बढ़ावा देने तथा भ्रष्टाचार और नफरत फैलाने वाली ताकतों का बहिष्कार करने की भी अपील की।

इस अवसर पर उन्होंने सभी महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इस बयान को जारी करने वालों में शीलम झा भारती (राष्ट्रीय अध्यक्षा, महिला प्रकोष्ठ), उर्मिला देवी, जानवी सिंह (झारखंड), उषा भारती (हरियाणा), रत्ना सिंह (दिल्ली), सिमरनजीत कौर, अमरजीत कौर (पंजाब), कृष्णा देवी, शांति पासवान, किरण कुशवाहा (बिहार) और शबनम सहित कई महिला नेताओं के नाम शामिल हैं।

यह बयान संयुक्त किसान मोर्चा (भारत), ग्राम स्वराज आंदोलन और भारत किसान जागृति संगठन के संयुक्त अभियान के तहत जारी किया गया।

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