बिहार में अतिथियों को देवता की तरह पूजने की रही है परंपरा – श्रवण कुमार, माघ पूजा में शामिल हुए 140 बौद्ध भिक्षु

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अनुमंडल संवाददाता, राजगीर।
राजीव लोचन की रिपोर्ट…

राजगीर(नालंदा)। वेणुवन में आयोजित 17वें विश्व माघ पूजा में कई देशों से आये हुए बौद्ध भिक्षुओं ने भाग लिया। वेणुवन भगवान बुद्ध का प्रिय स्थल रहा था। राजा बिम्बिसार ने भगवान बुद्ध को यह बागीचा दान में दिया था। वेणुवन को बांस का जंगल भी कहा जाता है। यह धम्म व विनय स्थल है। माघ पूजा में मंगलवार को शामिल होते हुए ग्रामीण विकास सह परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार में अतिथियों को देवता के समान पूजने की परंपरा रही है। बुद्ध के रास्ते पर चलकर ही करुणा, मैत्री, प्रेम व भाईचारे को आगे बढ़ाया जा सकता है। सूबे की सरकार ने बौद्ध सर्किटों का विकास किया है। नालंदा की धरती का दस हजार साल से भी ज्यादा पुराना इतिहास रहा है। नालंदा पूरी दुनिया को ज्ञान की रोशनी दिया करता था। उसे फिर से विश्व में कायम करने के लिए ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा नालंदा में नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है। मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि वेणुवन में भगवान बुद्ध ने पांच बार वर्षावास किया। उनका यह सबसे प्रिय स्थल रहा है। थाईलैंड के भिक्षु आर्यवंग्सो की सहयोग व प्रेरणा से यहां पर विश्व माघ पूजा हो रही है।

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बौद्ध भिक्षु आर्यवंग्सो ने कहा कि बुद्ध के बताये पंचशील सिद्धांत को अपनाकर जीवन को सफल बनाया जा सकता है। वेणुवन का काफी महत्व है। इस पूजा में विभिन्न 15 बौद्ध मठों के मठाधीश तथा थाईलैंड के 140 सदस्यीय बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। बौद्ध मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण धार्मिक हो गया। संयोजक डॉ. जर्नादन उपाध्याय ने बताया कि आज के दिन का बौद्ध साहित्य में काफी महत्वपूर्ण स्थान है। इसमें विशिष्ट अतिथि सासंद कौशलेंद्र कुमार के अलावा थाईलैंड की पूर्व मंत्री लेडी सुभद्रा, थाईलैंड स्थित बैंकांक के थम्मसात विश्वविद्यालय के प्रो डॉ. नितिकांत, थाईलैंड की पूर्व राजदूत सुचित्रा, थाईलैंड के उद्योगपतियों में रोजना वानिच्य व सुरापोल ने माघ पूजा को लेकर अपनी राय प्रकट किए। इस अवसर पर डॉ. जर्नादन उपाध्याय, सर्वजीत उपासक, जदयू प्रखंड अध्यक्ष जयराम सिंह, जदयू नेता मुन्ना कुमार, जदयू नगर अध्यक्ष राकेश कुमार सहित अन्य मौजूद थे।

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