यूजीसी के समर्थन में 26 फरवरी को बिहारशरीफ में धरना-प्रदर्शन

0
IMG-20260224-WA0069

प्रेम सिंघानिया की रिपोर्ट,

बिहारशरीफ। बिहारशरीफ स्थित अस्पताल चौक पर 26 फरवरी 2026 को यूनिवर्सिटी ग्रंट्स कमीशन (यूजीसी) के समर्थन में जिलाधिकारी, नालंदा के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम अतिपिछड़ा/दलित/अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के उद्देश्य से बिहारशरीफ के बी.एन. पहाड़ी सहित नालंदा जिले के विभिन्न गांवों एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।

इस अवसर पर अतिपिछड़ा/दलित/अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदेव चौधरी एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल पासवान ने संयुक्त रूप से कहा कि यूजीसी का गठन वर्ष 1945 में दिल्ली, बनारस और अलीगढ़ के केंद्रीय विश्वविद्यालयों के संदर्भ में प्रारंभिक रूप से किया गया था। वर्ष 1947 में इसका विस्तार करते हुए सभी भारतीय विश्वविद्यालयों को इसमें शामिल करने का निर्णय लिया गया। अगस्त 1949 में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग (1948-49) की सिफारिश पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के गठन की अनुशंसा की गई।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1952 में केंद्र सरकार ने निर्णय लिया कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों को दिए जाने वाले सभी अनुदान यूजीसी के माध्यम से नियंत्रित किए जाएंगे। 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद द्वारा यूजीसी का औपचारिक उद्घाटन किया गया। बाद में वर्ष 1956 में संसद द्वारा पारित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के तहत यूजीसी एक वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय शिक्षा में शिक्षण, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के मानकों का समन्वय, निर्धारण और संरक्षण करना है।

नेताओं ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है और जाति, वर्ग, वर्ण, धर्म या संप्रदाय के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव का विरोध करता है। उन्होंने कहा कि यूजीसी के 2026 के संशोधित नियम अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा अन्य सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होंगे। वर्ष 2012 के नियमों में जहां भेदभाव के मुद्दे उठाए गए थे, वहीं 2026 के संशोधित प्रावधानों में जाति आधारित भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

उन्होंने छात्र-नौजवानों, बुद्धिजीवियों, किसानों एवं दुकानदारों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर धरना-प्रदर्शन को सफल बनाएं।

इस अवसर पर जितेंद्र कुमार, उषा देवी, जगन्नाथ दास, सरवन देवी, जैबुल देवी, मनीष कुमार, राजू कुमार, अमन कुमार, राहुल कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *