रबी-खरीफ छोड़ स्ट्रॉबेरी से चमकी किस्मत! नालंदा में स्ट्रॉबेरी खेती से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोज कमा रहे नकद आमदनी

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शंकर कुमार सिन्हा की रिपोर्ट, नूरसराय, नालंदा। जिले के नूरसराय प्रखंड अंतर्गत मनारा गांव के किसान अब पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए नगदी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। गांव के प्रगतिशील किसान राजेश प्रसाद ने रबी और खरीफ की पारंपरिक फसलों से अलग हटकर अपने एक एकड़ खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है और इससे प्रतिदिन अच्छी नकद आमदनी अर्जित कर रहे हैं। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

राजेश प्रसाद बताते हैं कि शुरुआत में स्ट्रॉबेरी की खेती को लेकर लोगों में संशय था, लेकिन सही जानकारी, आधुनिक तकनीक और मेहनत के दम पर उन्होंने इसे सफल बना दिया। उन्होंने खेत में ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) पद्धति अपनाई है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों को आवश्यक मात्रा में नमी मिलती रहती है। साथ ही, जैविक खाद और उचित देखभाल से फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।

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उनका कहना है कि किसान यदि रबी और खरीफ फसलों के साथ-साथ नगदी फसलों की भी खेती करें तो उनकी आय दोगुनी हो सकती है। स्ट्रॉबेरी की बाजार में अच्छी मांग है, खासकर शहरी क्षेत्रों में इसकी खपत अधिक है। स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के शहरों से भी व्यापारी सीधे खेत पर पहुंचकर फसल खरीद रहे हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य और तत्काल भुगतान मिल रहा है।

राजेश प्रसाद के अनुसार, प्रारंभिक पूंजी निवेश के बाद स्ट्रॉबेरी की खेती से प्रतिदिन 10 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी संभव है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि खेती में नियमित देखभाल, समय पर सिंचाई, रोग नियंत्रण और बाजार की समझ जरूरी है। सही मार्गदर्शन मिलने पर यह खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है।

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गांव के अन्य किसान भी अब स्ट्रॉबेरी की खेती को लेकर रुचि दिखा रहे हैं। राजेश प्रसाद समय-समय पर उन्हें खेती की तकनीक, पौधरोपण और देखभाल के तरीके बताते हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान नगदी फसलों से जुड़ सकें और अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।

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