लघु पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू, भक्ति के रंग में रंगा राजगृह तीर्थ,पहले दिन सम्पन्न हुई गर्भ कल्याणक क्रियाएं :

0
IMG-20260210-WA0077

अनुमंडल संवाददाता, राजगीर

राजीव लोचन की रिपोर्ट…

राजगीर (नालंदा)। जैन धर्म की आस्था का प्रमुख केंद्र एवं पावन सिद्ध क्षेत्र राजगीर इन दिनों भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर है। यहां दो दिवसीय लघु पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ सराक केशरी मुनि श्री 108 विशल्य सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में श्रद्धा और धूमधाम के साथ हुआ। महोत्सव के पहले दिन पूरा वातावरण धर्ममय हो उठा और मुनि श्री के तप, त्याग व ज्ञान की आभा से श्रद्धालु मंत्रमुग्ध नजर आए।
कार्यक्रम की शुरुआत मंगल ध्वजारोहण के साथ हुई। इसके बाद भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। केसरिया और पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित महिलाएं मस्तक पर मंगल कलश धारण कर अनुशासित कतारों में चल रही थीं। वहीं पुरुष वर्ग हाथों में जैन ध्वज थामे बाजे-गाजे और जयकारों के साथ शोभायात्रा की गरिमा बढ़ा रहे थे। श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संगम पूरे मार्ग में देखने को मिला।

1001245338

शोभायात्रा मंडप स्थल पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई, जहां धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। महोत्सव के पहले दिन का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण क्षण तब आया, जब परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के अष्टधातु निर्मित चरण चिह्नों को विराजमान करने हेतु वेदी शिलान्यास की पावन प्रक्रिया संपन्न हुई।
मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने नींव में ईंट, मंगल कलश एवं विभिन्न मांगलिक द्रव्य स्थापित किए। गुरु भक्ति का यह अनुपम दृश्य हर किसी को भावुक कर गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्रत्येक श्रद्धालु ईंट नहीं, बल्कि अपनी श्रद्धा और आस्था की आधारशिला रख रहा हो।
महोत्सव के दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *