फाइलेरिया से बचाव के लिए साल में एक बार दवा जरूरी : सिविल सर्जन, बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं, खाली पेट दवा लेने से बचें
बिहारशरीफ (नालंदा)।
फाइलेरिया एक गंभीर और लाइलाज बीमारी है, जिससे बचाव का एकमात्र उपाय समय पर दवा सेवन है। यदि किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हों, तब भी सावधानी बरतना जरूरी है। साल में सिर्फ एक बार फाइलेरिया रोधी दवा खाने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। यह बातें नालंदा के सिविल सर्जन डॉ. प्रकाश सिंह ने सोमवार को सदर अस्पताल में आयोजित एमडीए (सर्वजन दवा सेवन) कार्यक्रम को लेकर प्रेस वार्ता के दौरान कहीं।
सिविल सर्जन ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों तक हर साल एक बार फाइलेरिया की दवा का सेवन कर लेता है, तो उसे जीवनभर इस बीमारी का खतरा नहीं रहता। उन्होंने लोगों के इस भ्रम को दूर किया कि ‘जब लक्षण नहीं हैं तो दवा क्यों खाएं’। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई बार खून में परजीवी मौजूद होते हैं, जिनका पता देर से चलता है और तब तक बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है।
दवा सेवन को लेकर जरूरी गाइडलाइन
डॉ. सिंह ने बताया कि दवा कभी भी खाली पेट नहीं खानी चाहिए। इसके अलावा दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं तथा जिन महिलाओं की डिलीवरी एक सप्ताह के भीतर हुई हो, उन्हें यह दवा नहीं दी जाएगी। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर उम्र के अनुसार दवा खिलाएंगी।
घबराएं नहीं, रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैयार
उन्होंने कहा कि दवा सेवन के बाद कुछ लोगों को हल्की उल्टी या चक्कर आना सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। स्कूलों में अक्सर एक बच्चे को उल्टी करते देख अन्य बच्चे भी डर के कारण वैसी प्रतिक्रिया देने लगते हैं, जो मनोवैज्ञानिक प्रभाव होता है।
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एडिशनल लेवल पर रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) तैनात की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और सीधे स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें।
प्रेस वार्ता के दौरान डीपीएम, उपाधीक्षक तथा अन्य स्वास्थ्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
