ट्राइबल खेल प्रतिभा खोज के लिए पूर्णिया और कटिहार में चलाया गया विशेष अभियान, बैट्री टेस्ट के बाद 112 ल़डकियों सहित कुल 350 से ज्यादा खेल प्रतिभाओं का हुआ चयन
अगले चरण में जमुई,रोहतास,बेतिया और कैमूर के जनजातीय इलाकों में होगी खेल प्रतिभा खोज
पटना, 5 जुलाई 2026:- राज्य में 12 से 14 आयुवर्ग के जनजातीय खेल प्रतिभा खोज के लिए पूर्णिया और कटिहार में 2 जुलाई से चार दिवसीय विशेष अभियान चलाया गया।
इस बात की जानकारी देते हुए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि 2 जुलाई से जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें खेलों की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) द्वारा एथलेटिक्स प्रतिभा खोज अभियान का प्रथम चरण आयोजित किया गया।चार दिनों तक पूर्णिया एवं कटिहार जिलों के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में चले अभियान का उद्देश्य जनजातीय समुदाय के प्रतिभाशाली बालक एवं बालिकाओं की पहचान करना था, ताकि उन्हें आगे बढ़ने का उचित अवसर और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
12 से 14 आयुवर्ग के खेल प्रतिभा खोज में 1000 से ज्यादा बच्चों ने भाग लिया और बैट्री टेस्ट के बाद 112 ल़डकियों सहित कुल 350 से ज्यादा खेल प्रतिभाओं का प्राथमिक चयन किया गया है जिनमे से पुनः उनकी क्षमता और प्रतिभा का मूल्यांकन कर राज्य के विभिन्न एकलव्य खेल प्रशिक्षण केंद्रों के लिए चयनित किया जाएगा।
प्रतिभा चयन के अगले फेज में जमुई,रोहतास,बेतिया और कैमूर के जनजातीय बहुल इलाकों में यह अभियान चलाया जाएगा।
जनजातीय खेल प्रतिभा खोज के इस अभियान की आवश्यकता पर श्री शंकरण ने कहा कि पूर्व में पटना, राजगीर तथा अन्य स्थानों पर आयोजित प्रतिभा खोज कार्यक्रमों के दौरान यह अनुभव किया गया कि जनजातीय एवं दूर-दराज़ क्षेत्रों के अनेक प्रतिभाशाली बच्चे आर्थिक, सामाजिक एवं भौगोलिक कारणों से चयन प्रक्रिया तक पहुँच ही नहीं पाते थे। ऐसे में उनकी प्रतिभा सामने आने से पहले ही पीछे रह जाती थी।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने इस बार बच्चों को अपने केंद्रों तक बुलाने के बजाय स्वयं उनके गाँवों और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुँचकर प्रतिभा खोज अभियान चलाया। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल संसाधनों या अवसरों की कमी के कारण खेलों से वंचित न रह जाए।
इस अभियान के माध्यम से चयनित बच्चों को उनके नज़दीकी एकलव्य केंद्रों से जोड़ा जाएगा, जहाँ उन्हें तीरंदाजी, एथलेटिक्स सहित अन्य खेलों में उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण और प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। यदि किसी क्षेत्र में खिलाड़ियों की संख्या और आवश्यकता अधिक होती है, तो वहाँ नए एकलव्य केंद्र स्थापित करने पर भी विचार किया जाएगा, ताकि खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र के निकट ही गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
भारत सरकार द्वारा जनजातीय खिलाड़ियों के लिए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन शुरू किया गया है। ऐसे में यह प्रतिभा खोज अभियान बिहार के लिए विशेष महत्व रखता है। इस पहल के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों की प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे भविष्य में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स तथा अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बिहार का प्रतिनिधित्व कर सकें।
यह अभियान केवल खिलाड़ियों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को खेलों के माध्यम से नई पहचान, बेहतर अवसर और उज्ज्वल भविष्य देने की दिशा में बिहार राज्य खेल प्राधिकरण का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
जनजातीय खेल प्रतिभा खोज में बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षक मो० हारून अंसारी,अविनाष सिंह,अभिषेक कुमार,विभाष कुमार,कोमल कुसारी,पुर्णिया एथलेटिक्स संध के सचिव एएम एच रहमान, चंदन कुमार ,
कटिहार से प्रशिक्षक चन्द्र भूषण सिंह करिहार एथलेटिक्स संघ के प्रशिक्षक साहिल अंसारी आदि की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही।
