नालंदा में बाल विवाह के खिलाफ चला जागरूकता अभियान, ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ ने 1600 किमी की यात्रा कर 3 लाख लोगों को किया जागरूक

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शंकर कुमार की रिपोर्ट,

बिहारशरीफ (नालंदा)। भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर संचालित 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत नालंदा जिले में बाल विवाह के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ की यात्रा के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आइडिया समाजसेवी संस्थान ने जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया।

अभियान के दौरान लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया और उन्हें इस कुप्रथा के खिलाफ शपथ दिलाई गई। साथ ही बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई। संस्थान के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह बच्चों के साथ होने वाला अपराध है, जो कानून की नजर में दंडनीय है।

इस अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सांसद कौशलेन्द्र कुमार द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किए गए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ ने मात्र 30 दिनों में लगभग 1600 किलोमीटर की यात्रा तय की। इस दौरान रथ 125 गांवों तक पहुंचा और करीब 3 लाख लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया गया। मुख्य मार्गों पर रथ के माध्यम से संदेश पहुंचाया गया, जबकि सुदूरवर्ती और दुर्गम गांवों में पहुंचने के लिए मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां का सहारा लिया गया, ताकि जिले का कोई भी क्षेत्र इस जागरूकता अभियान से अछूता न रहे।

रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आइडिया समाजसेवी संस्थान की निदेशक रागिनी कुमारी ने इस अभियान को केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि “परिवर्तनकारी यात्रा” बताया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य को कुपोषण, अशिक्षा और गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील करते हुए कहा कि बाल विवाह को केवल सामाजिक कुप्रथा न मानकर बच्चों के खिलाफ होने वाला अपराध समझा जाए।

उन्होंने बताया कि इस अभियान को तीन चरणों में योजनाबद्ध तरीके से चलाया गया। पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ा गया, जबकि दूसरे चरण में धर्मगुरुओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई। धर्मगुरुओं से अपील की गई कि वे किसी भी विवाह को संपन्न कराने से पहले वर-वधू की आयु की सख्ती से जांच करें।

अभियान के दौरान विवाह आयोजनों से जुड़े विभिन्न सेवा प्रदाताओं जैसे कैटरर्स, सजावट करने वाले, बैंकट हॉल संचालकों और बैंड-बाजा समूहों को भी जागरूक किया गया। उन्हें चेतावनी दी गई कि बाल विवाह में किसी भी प्रकार की सेवा या सहयोग देना कानूनन अपराध है और इसके लिए सजा का प्रावधान है।

तीसरे चरण में जिले की विभिन्न पंचायतों में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के कारण यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दिया। इससे अब बाल विवाह मुक्त नालंदा का लक्ष्य वास्तविकता के काफी करीब नजर आ रहा है।

इस अवसर पर मनु कुमार, उज्ज्वल कुमार, विवेक कुमार, गंगोत्री कुमारी, सुशीला देवी, विनोद पांडे और अश्वनी कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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