सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा में के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद, उनके गांव कल्याण बीघा में निशांत कुमार को कमान सौंपने की हो रही मांग
हरनौत – रंगों के उत्सव होली के बीच बिहार की राजनीति में एक बार फिर भारी उथल-पुथल हो गया है। सियासी गलियारों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर लंबे दोनों से हो रही चर्चा पर विराम लग गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही बिहार की कमान छोड़कर दिल्ली की ओर रवाना होने वाले हैं। क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिग्गज नेताओं के साथ मिलकर गुरुवार को विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा के लिए नामांकन का पर्चा दाखिल किए हैं। इस बदलाव के बीच मुख्यमंत्री के पैतृक गांव कल्याण विगहा में उनके पुत्र निशांत कुमार को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री के पैतृक गांव कल्याण बीघा के लोगों का स्पष्ट मानना है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी और प्रदेश को संभालने के लिए निशांत कुमार ही सबसे उपयुक्त विकल्प हैं। स्थानीय निवासी जदयू कार्यकर्ता इंजीनियर रवि शंकर कुमार, संतोष कुमार सिंह, अवधेश सिंह,रणजीत सिंह, एवं जदयू प्रखंड अध्यक्ष रविकांत कुमार ने शाम 5:00 बजे बताया कि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते ही और निशांत कुमार को कमान सौंपी जाती है, तभी बिहार का विकास सुरक्षित रहेगा। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसी अन्य को सत्ता सौंपी गई, तो बिहार की व्यवस्था बर्बाद हो सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह लालू प्रसाद यादव ने राबड़ी देवी को कमान सौंपी थी, वैसी ही स्थिति से बचने के लिए एक सक्षम उत्तराधिकारी की आवश्यकता है।
पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, निशांत कुमार को राजनीति में लाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। कल्याण विगहा गांव की रहने वाले कक्कू सिंह ने बताया कि निशांत कुमार न केवल उच्च शिक्षित हैं, बल्कि बेहद सौम्य और शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं। ग्रामीणों का मानना है कि निशांत कुमार अपने पिता नीतीश कुमार के पदचिन्हों पर चलते हुए बिहार को आगे ले जा सकते हैं। पार्टी के भीतर भी यह आम सहमति बनती दिख रही है कि युवा नेतृत्व के रूप में निशांत ही संगठन को एकजुट रख सकते हैं और उनके राजनीति में आने से युवाओं में नया जोश भरेगा।
राजनीतिक हलकों में चल रही इन चर्चाओं के बीच भाजपा के रुख पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं। हालांकि, कल्याण विगहा के लोगों का तर्क है कि जनादेश उनके पास है और पार्टी का निर्णय सर्वोपरि होना चाहिए। ग्रामीणों का दावा है कि मुख्यमंत्री ने भी इन भावनाओं को देखते हुए कमान निशांत के हाथ में देने का मन बना लिया है। बता दें कि निशांत कुमार ने हाल ही में होली के बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखने और पार्टी ज्वाइन करने के संकेत दिए थे। अब उनके सीधे मुख्यमंत्री पद की मांग ने बिहार की राजनीति के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा में नामांकन का पर्चा दाखिल करने के बाद जदयू के कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी दिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के पैतृक गांव नालंदा के हरनौत स्थित कल्याण बीघा में ग्रामीण लोग काफी नाराज हैं। वही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार की नई सरकार को सपोर्ट करने की बात कहीं है
