नालन्दा में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पर कार्यशाला, उद्यमियों को मिला विपणन व डिजिटल प्रबंधन का प्रशिक्षण

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बिहारशरीफ। विकास आयुक्त कार्यालय, एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देश में एमएसएमई – विकास कार्यालय, पटना द्वारा मंगलवार को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला उद्योग केन्द्र, नालन्दा, बिहारशरीफ के परिसर में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में एमएसएमई इकाइयों के प्रतिनिधि एवं योजना के लाभार्थी शामिल हुए।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सचिन कुमार, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, नालन्दा तथा श्रीकांत सिंह, अग्रणी जिला प्रबंधक, नालन्दा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रोचक राठौर, सहायक निदेशक ग्रेड-I ने की। इस अवसर पर निदेशक श्री आर. के. चौधरी (एमएसएमई विकास कार्यालय, पटना), श्री अजय कुमार (परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र नालन्दा), डॉ. ए. के. वर्मा (विजिटिंग प्रोफेसर एवं विपणन सलाहकार) एवं श्री अंकेश कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि श्रीकांत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा 18 पारंपरिक व्यवसायिक संकायों को एमएसएमई से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे कारीगर आत्मनिर्भर बन सकें।

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तकनीकी सत्र में डॉ. रोचक राठौर ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की प्रमुख विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने 26 जनवरी समारोह एवं दिल्ली हाट जैसे राष्ट्रीय मंचों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों में उत्पादों की प्रदर्शनी से स्थानीय कारीगरों को व्यापक पहचान मिलती है और बाजार का दायरा बढ़ता है।

विज्ञापन एवं पैकेजिंग प्रमोशन पर सत्र का संचालन करते हुए श्री संजीत राज ने बताया कि प्रभावी ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग उद्यमियों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी साधन बन सकता है।

प्रो. ए. के. वर्मा ने वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल लेन-देन, ऑर्डर डिलीवरी सिस्टम एवं इन्वेंटरी मैनेजमेंट पर व्यावहारिक सुझाव दिए। उन्होंने उद्यमियों को संगठित तरीके से व्यवसाय संचालन की आवश्यकता पर बल दिया।

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कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से अपने प्रश्न पूछे, जिनका विस्तार से समाधान किया गया। प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि कार्यशाला से एमएसएमई इकाइयों एवं प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को भविष्य में व्यावसायिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा।

अंत में डॉ. रोचक राठौर ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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