पटना हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: बच्चे के असली माता-पिता का पता लगाने के लिए हुआ डीएनए टेस्ट।
बिहार शरीफ, नालंदा : पटना उच्च न्यायालय ने एक बच्चे की कस्टडी को लेकर दायर ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए डीएनए (डीएनए) टेस्ट कराने का आदेश दिया है। मामला नालंदा जिले के बिहार थाना कांड संख्या 453/2023 से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता अविनाश कुमार ने अपने बच्चे को विपक्षी संख्या 8 के ‘अवैध कब्जे’ से मुक्त कराने और कस्टडी दिलाने की गुहार लगाई है।
न्यायमूर्ति सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने आदेश दिया था कि नालंदा के सिविल सर्जन, पुलिस अधीक्षक (एसपी) की मौजूदगी में बच्चे और याचिकाकर्ता की पत्नी सिंकी कुमारी के डीएनए सैंपल एकत्र करेंगे। अदालत ने प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया है कि सैंपल को याचिकाकर्ता की उपस्थिति में ही सील किया जाए और उस पर उसके हस्ताक्षर भी लिए जाएं। इसी प्रक्रिया को पूरी करने को लेकर शुक्रवार को की कार्यालय में बच्चे और दंपति का डीएनए सैंपल लिया गया। नालंदा सिविल सर्जन और नालंदा एसपी मुख्य रूप से मौजूद रहे।

उच्च न्यायालय ने नालंदा एसपी को निर्देश दिया है कि वे सील किए गए सैंपलों को जांच के लिए पटना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजें। एफएसएल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट अगले छह सप्ताह के भीतर अदालत में पेश करें।
इससे पहले मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, बिहारशरीफ ने भी 6 जनवरी 2026 को डीएनए टेस्ट की अनुमति दी थी। अब हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को जांच और सैंपल संग्रह में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की है। इस टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद ही बच्चे के भविष्य और उसकी कस्टडी पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है।
