कार्बाइड गन से आँखों को हो रहे गंभीर नुकसान पर नालंदा के नेत्र चिकित्सकों की प्रेस वार्ता

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बिहार शरीफ (नालंदा) : दीपावली 2025 के दौरान कार्बाइड गन और अन्य विस्फोटक पटाखों से होने वाली आँखों की चोटों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। नालंदा जिले के प्रमुख नेत्र चिकित्सकों ने आज एक संयुक्त प्रेस वार्ता कर इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

कैल्शियम कार्बाइड और पानी से तैयार किए जाने वाले इन तथाकथित “कार्बाइड गन” उपकरणों से एसिटिलीन गैस बनती है, जो विस्फोट के समय धातु और चूना के छोटे-छोटे कणों को हवा में फैलाती है। यह आँखों के लिए अत्यंत खतरनाक साबित हो रहा है, विशेषकर बच्चों के लिए।

🔹 प्रमुख आँकड़े

  • मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ और पुणे में 200 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
  • इनमें कई बच्चों की दृष्टि स्थायी रूप से चली गई है।
  • वर्ष 2024 की तुलना में मामलों में 45% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के मामलों में 50% की बढ़ोतरी हुई है।
  • केवल नालंदा जिले में लगभग 70 लोग कार्बाइड गन से घायल हुए, जिनमें 10 लोगों की दृष्टि पूरी तरह समाप्त हो गई है।

🔹 कार्बाइड गन की उपलब्धता के कारण

  1. कार्बाइड पर प्रतिबंध के बावजूद बाजार में इसकी व्यापक उपलब्धता
  2. जुगाड़ तकनीक से इसका आसानी से निर्माण होना।
  3. सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर वायरल वीडियो से प्रेरित होकर बच्चों द्वारा इसका प्रयोग।
  4. इसे हानिरहित खिलौना समझने की गलत धारणा

🔹 कार्बाइड गन के दुष्परिणाम

  1. गंभीर नेत्र आघात – कॉर्निया जलना, रासायनिक जलन, और बाहरी कणों का आँख में प्रवेश।
  2. स्थायी दृष्टिहीनता और चेहरों पर विकृति का खतरा
  3. अस्पतालों पर अचानक दबाव – नेत्र उपचार केंद्रों में मरीजों की भीड़ बढ़ी।

🔹 प्राथमिक उपचार के सुझाव

  1. चोट लगने पर तुरंत आँखों को स्वच्छ पानी से धोएँ
  2. किसी भी सूक्ष्म कण को सावधानीपूर्वक हटाएँ, रगड़ें नहीं।
  3. तुरंत नेत्र चिकित्सक से परामर्श लें
  4. कॉर्निया ज़ख्म या अन्य जटिलताओं के लिए समय-समय पर जांच करवाते रहें

🔹 चिकित्सकों की अनुशंसा

  1. कड़ा प्रतिबंध – कार्बाइड गन के निर्माण, बिक्री, परिवहन और उपयोग पर सख्त कार्रवाई हो।
  2. जन-जागरूकता अभियान – माता-पिता, स्कूलों और बच्चों को इस खतरे से अवगत कराया जाए।
  3. कानूनी उपाय – निर्माणकर्ताओं, विक्रेताओं और सोशल मीडिया प्रमोटरों पर FIR दर्ज की जाए
  4. अस्पतालों की तैयारी – आपातकालीन नेत्र सेवाएँ, आवश्यक उपकरण और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  5. सामुदायिक सतर्कता – आम नागरिक अवैध निर्माण या उपयोग की सूचना प्रशासन को दें।

इस प्रेस वार्ता में डॉ. अरविंद कुमार सिंहा, डॉ. अजय कुमार, डॉ. नीतीश कुमार, डॉ. अभिनव कुमार सिंहा एवं आईएमए अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार उपस्थित रहे।
सभी चिकित्सकों ने लोगों से अपील की कि वे कार्बाइड गन जैसी खतरनाक चीजों से बच्चों को दूर रखें और सुरक्षित तरीके से दीपावली मनाएँ।

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