राजगीर में खुलेगा एमएसएमई का एक्सटेंशन सेंटर तो गया में इत्र उद्योग : जीतन राम मांझी

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नालंदा में योजना के क्रियान्वयन की धीमी प्रगति पर मंत्री ने जतायी नाराजगी, लगायी फटकार :
एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाकर ही समाज के कमजोर वर्गों को जोड़ा जा सकता है मुख्यधारा से

अनुमंडल संवाददाता, राजगीर। राजीव लोचन की रिपोर्ट, राजगीर(नालंदा)। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हुनरमंद लोगों को रोजगार करने का बहुत बड़ा अवसर दिया है। इसका लाभ जरूर उठायें। इसके लिए टूल्स किट के अलावा दो लाख रुपये बिना बैंक गारंटी के लोन भी दिया जाता है। यह आयोजन एमएसएमई विकास कार्यालय के माध्यम से हो रहा है। ये बातें केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय प्रदर्शनी सह व्यापार मेला का उद्घाटन करते हुए कही। श्री मांझी ने कहा कि इसमें 110 पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, मोची, सुनार, नाई, राजमिस्त्री, खिलौना व्यापार, मछली पालन, नाव बनाने वाला, शास्त्र बनाने वाला, माला बनाने वाले, मालाकार , ताला बनाने वाला, जूता चप्पल बनाने वाले सहित अन्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि राजगीर में एमएसएमई एक्सटेंशन सेंटर तथा गया में इत्र उद्योग की स्थापना होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि देश में अभी भी लगभग 65 से 70 प्रतिशत लोग गरीबी से जूझ रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और हुनरमंद लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। देश में करीब सात करोड़ 87 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जो रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम है। सरकार का लक्ष्य 30 लाख लोगों को हुनर और रोजगार से जोड़ना है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत 15 हजार रुपये के पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण के लिए टूल किट और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

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उन्होंने यह भी कहा कि अब तक देश में लगभग 34 करोड़ लोगों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से नियोजन उपलब्ध कराया गया है। हालांकि नालंदा जिले में योजना के क्रियान्वयन की धीमी प्रगति पर मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिले में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत मात्र 1039 लोगों का ही अब तक पंजीकरण हुआ है, जबकि 649 लोगों को प्रशिक्षण और केवल 554 लोगों को टूल किट वितरित किए गए हैं। इन कमजोर आंकड़ों पर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि साठ हजार 472 कुल किट बांटने थे परन्तु 554 ही बंटा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाकर ही समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने बैंकिंग प्रणाली में सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि बैंक स्वयं एमएसएमई लाभार्थियों तक पहुंचे और उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर डीडीसी शुभम कुमार ने कहा कि कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र से सबसे अधिक लोग जुड़े हुए हैं। नालंदा जिले में मिट्टी, लोहा, लकड़ी, कपड़ा और चमड़ा से जुड़े लगभग 56 हजार 430 उद्यमी कार्यरत हैं। इनमें से 125 उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग एक लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया है। मेले में विभिन्न क्षेत्रों से आये कारीगरों ने अपने पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई है। यह आयोजन कारीगरों को बाजार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम में एमएसएमई-डीएफओ के निदेशक आरके चौधरी ने स्वागत किया। मौके पर सचिन कुमार, कैप्टन सत्यप्रकाश, आरसी मंडल, मोहन कुमार, श्रीकांत सिंह सहित अन्य ने भी विचार व्यक्त किया। तकनीकी सत्र में सत्यम कुमार, सोनल पटेल ने कारीगरों एवं उद्यमियों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग तथा सेल्स एवं मार्केटिंग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मंत्री द्वारा कारीगरों के स्टॉलों का अवलोकन किया गया।

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