संस्कारयुक्त शिक्षा से सशक्त राष्ट्र निर्माण संभव : अनंत

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अनुमंडल संवाददाता, राजगीर। राजीव लोचन की रिपोर्ट,

राजगीर(नालंदा): पूज्य तपस्वी श्री जगजीवन जी महाराज सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय आचार्य कार्यशाला के दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य अनंत कुमार सिन्हा, उप-प्राचार्य रामजी प्रसाद सिन्हा, आचार्य कार्यशाला प्रमुख अभय एवं सह-प्रमुख संगीता कुमारी ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर प्राचार्य अनंत कुमार सिन्हा ने आचार्यों का मार्गदर्शन करते हुए विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, प्रभावी समय-सारिणी तथा आदर्श छात्र निर्माण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। शारीरिक गतिविधियों और योग के माध्यम से विद्यार्थियों के प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं शारीरिक विकास को सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। उन्होंने संस्कारयुक्त, अनुशासित एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करने की संकल्पना को विद्यालय की प्राथमिकता बताया। उप-प्राचार्य रामजी प्रसाद सिन्हा ने आधारभूत विषयों की सुदृढ़ता पर बल देते हुए पंचकोशीय विकास को शिक्षा का मूल उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा कि संतुलित शिक्षा पद्धति से ही विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बिहार क्षेत्र के सहक्षेत्र कार्यवाह विनेश प्रसाद ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए समर्पण, देशभक्ति, स्वदेशी एवं स्वाभिमान के भाव को जागृत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने समरस, संगठित और सशक्त भारत निर्माण में विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रेखांकित की। मंच संचालन मुकुन्द वत्स ने किया। कार्यशाला में विद्यालय के सभी आचार्यों की सक्रिय सहभागिता रही।

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