जननायक कर्पूरी ठाकुर की 38वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित
बिहारशरीफ: आनंद मार्ग ब्लॉक चौक पर अतिपिछड़ा/दलित/अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में भारत रत्न एवं जननायक कर्पूरी ठाकुर की 38वीं पुण्यतिथि श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए गए और उनके विचारों को याद किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदेव चौधरी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर स्वतंत्रता सेनानी, दूरदर्शी राजनेता और किसानों, महिलाओं तथा समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले अग्रणी व्यक्तित्व थे। ‘जननायक’ के रूप में प्रसिद्ध कर्पूरी ठाकुर ने अपना संपूर्ण सार्वजनिक जीवन गरीबों, पिछड़ों और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के सशक्तिकरण को समर्पित किया। उन्होंने स्वतंत्र भारत में सामान्य वर्ग की महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सकारात्मक पहल की शुरुआत की।
संघर्ष और सादगी का प्रतीक
कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिले के पितौंझिया (अब कर्पूरी ग्राम) में हुआ था। वे सामाजिक रूप से पिछड़े नाई समुदाय से आते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और छात्र जीवन से ही सामाजिक चेतना के कार्यों में सक्रिय रहे।
वे 1952 से 1988 तक लगातार विधायक रहे और 1977 में सांसद भी चुने गए। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने पिछड़ा वर्ग आरक्षण, मैट्रिक तक निःशुल्क शिक्षा, उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा, सरकारी कामकाज में हिंदी को बढ़ावा, अंत्योदय योजना की शुरुआत, वृद्धावस्था पेंशन योजना लागू करने और शराबबंदी जैसे ऐतिहासिक फैसले लिए। मुंगेरीलाल आयोग की सिफारिशों को लागू कर उन्होंने बिहार में 12 प्रतिशत अतिपिछड़ा वर्ग और 8 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिलाया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल पासवान ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर सादगी और ईमानदारी के प्रतीक थे। वे साधारण धोती-कुर्ता पहनते थे और आम लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझते थे।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 17 फरवरी 1988 को उनका निधन हो गया, लेकिन वे आज भी सामाजिक न्याय के सबसे बड़े प्रतीकों में गिने जाते हैं। 23 जनवरी 2024 को भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया।
कार्यक्रम में जिला महासचिव उमेश पंडित, फुटपाथ संघर्ष मोर्चा के जिला महासचिव महेंद्र प्रसाद, सोमनाथ कुमार, पप्पू प्रसाद, शिव पासवान, अवधेश प्रसाद, जोगेंद्र पासवान, सहदेव साव, रवि रंजन कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने जननायक के बताए मार्ग पर चलने और सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
