राजगीर जू सफारी और पटना जू के बीच शेरों का आदान-प्रदान, प्रजनन कार्यक्रम को मिलेगा बल
राजगीर–पटना के बीच शेरों का ऐतिहासिक आदान-प्रदान, वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती, राजगीर से पटना जू भेजे गये मादा शेरनी
अनुमंडल संवाददाता,राजगीर
राजीव लोचन की रिपोर्ट।
राजगीर (नालंदा)। बिहार में वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजगीर जू सफारी और संजय गांधी जैविक उद्यान पटना के बीच शेरों के आदान-प्रदान का कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है। मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी गयी है। यह पहल राज्य में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में संस्थागत समन्वय और दूरदर्शी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 15 फरवरी 2026 को राजगीर जू सफारी से लगभग 13 माह आयु की दो स्वस्थ मादा शेरनियों को विधिवत रूप से पटना जू स्थानांतरित किया गया। स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों, वन क्षेत्र पदाधिकारियों और प्रशिक्षित एनिमल कीपरों की निगरानी में अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक पद्धति से संपन्न हुई।
परिवहन के दौरान शेरनियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आराम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सभी आवश्यक चिकित्सीय प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया गया है। पटना पहुंचने के बाद दोनों शेरनियों को निर्धारित क्वारंटीन अवधि में रखा गया है। क्वारंटीन अवधि पूर्ण होने और स्वास्थ्य परीक्षण संतोषजनक पाए जाने के बाद उन्हें पर्यटकों के अवलोकन के लिए सुरक्षित इन्क्लोजर में स्थानांतरित किया जाएगा।
इसी क्रम में 15 फरवरी को ही पटना जू से लगभग सात वर्ष आयु की एक मादा शेर को राजगीर जू सफारी भेजा गया है। वर्तमान में उसे भी क्वारंटीन में रखा गया है। स्वास्थ्य परीक्षण और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात उसे भी पर्यटकों के लिए निर्धारित बाड़े में छोड़ा जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह आदान-प्रदान कार्यक्रम प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने, स्वस्थ प्रजनन कार्यक्रम को बढ़ावा देने तथा वैज्ञानिक प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे न केवल वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी, बल्कि राज्य के दोनों प्रमुख उद्यानों के बीच समन्वय भी और बेहतर होगा।
