नालंदा विश्वविद्यालय के सिटी कैंपस, राजगीर में पुस्तक प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ, नेशनल बुक ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी में 200 से अधिक छात्रों की उत्साहपूर्ण सहभागिता
राजगीर : नालंदा विश्वविद्यालय ने राजगीर स्थित अपने सिटी कैंपस में आज सार्वजनिक पुस्तक प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ किया। यह आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय पुस्तकालय एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (नेशनल बुक ट्रस्ट) के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। सिटी कैंपस का ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि यहीं से नालंदा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत हुई थी, जिसे बिहार सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया था।
पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी एवं नालंदा के जिलाधिकारी श्री कुंदन कुमार द्वारा संयुक्त रूप से पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर 200 से अधिक छात्रों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों, स्कूली बच्चों, संकाय सदस्यों, विश्वविद्यालय कर्मियों तथा अन्य गणमान्य अतिथियों की सक्रिय भागीदारी रही।
सिटी कैंपस के खुले लॉन में आयोजित यह प्रदर्शनी 26 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि यह पुस्तक प्रदर्शनी बच्चों और युवाओं में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं बौद्धिक परंपराओं के प्रति जिज्ञासा जागृत करने का माध्यम बनेगी। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय की ‘सहभागिता’ पहल के अंतर्गत सिटी कैंपस को सामुदायिक संलग्नता एवं कौशल विकास का जीवंत केंद्र बनाने के विश्वविद्यालय के दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
कुलपति ने सिटी कैंपस से जुड़े तीन प्रमुख फोकस क्षेत्रों का उल्लेख किया—
पहला, स्कूली बच्चों के लिए शिक्षण पहलें;
दूसरा, स्थानीय महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHG) के साथ संलग्नता;
और तीसरा, छात्रों, युवाओं एवं कार्यरत अनुभवी लोगों के लिए आईटी एवं कौशल विकास केंद्र की स्थापना।
उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की विदेशी भाषाओं के अध्ययन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राजगीर, गया जी तथा आसपास के विरासत स्थलों पर आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों से संवाद स्थानीय युवाओं एवं छात्रों के लिए नए अवसर सृजित कर सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के सभी विद्यालय एवं विभाग इस मंच को स्थानीय समुदायों एवं स्कूली छात्रों के लिए अधिकतम उपयोगी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस अवसर पर जिलाधिकारी श्री कुंदन कुमार ने नालंदा विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए छात्रों से रचनात्मकता और नवाचारी सोच को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने नालंदा की गौरवशाली सभ्यतागत विरासत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शून्य की अवधारणा, जिसने आज के डिजिटल संसार की नींव रखी है, भारत की भूमि से उत्पन्न होकर विश्व तक पहुँची।
जिलाधिकारी ने पुस्तक प्रदर्शनियों को ज्ञानवर्धन और विचारोत्तेजना का प्रभावी माध्यम बताते हुए नालंदा विश्वविद्यालय को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के साथ मिलकर छात्रों, स्वयं सहायता समूहों एवं स्थानीय समुदायों के लिए कौशल विकास के अवसरों के विस्तार की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। साथ ही, उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय में संरक्षित भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के हस्तलिखित नोट्स के ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक महत्व को भी रेखांकित किया।
प्रदर्शनी के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक विविधता एवं सामुदायिक सहभागिता को दर्शाने वाले कई आकर्षक स्टॉल लगाए गए। विश्वविद्यालय के कॉमन आर्काइवल रिसोर्स सेंटर द्वारा स्थापित स्टॉल में दुर्लभ अभिलेखीय सामग्री प्रदर्शित की गई, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद की हस्तलिखित डायरी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। वहीं, पुरातत्व विभाग के स्टॉल में मानव एवं पशुओं के जीवाश्म तथा पुरावशेष प्रदर्शित किए गए, जो मानव विकास की कालानुक्रमिक यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
इस स्टॉल पर आगंतुकों के नाम मिस्त्री चित्रलिपि में लिखे गए तथा स्कूली बच्चों के लिए हड़प्पा मुहर की छाप वाले निःशुल्क बुकमार्क भी वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा समर्थित स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल में उनके द्वारा निर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। नेशनल बुक ट्रस्ट के स्टॉलों में विभिन्न विषयों की पुस्तकों का व्यापक संग्रह उपलब्ध कराया गया, जिसने इस प्रदर्शनी को ज्ञान और संस्कृति का समृद्ध मंच बना दिया।
उद्घाटन कार्यक्रम का समापन स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रमों के साथ हुआ, जिनमें स्थानीय परंपराओं और विरासत को सुंदर ढंग से प्रदर्शित किया गया।
