मलमास मेला में स्नान करना माना जाता है शुभ,ढाई साल पर लगता है मलमास मेला
मलमास मेले में तैंतीस कोटि देवी-देवता रहते हैं राजगीर में विराजमान
मेले के दौरान नहीं होते हैं शुभ कार्य
अनुमंडल संवाददाता, राजगीर।
राजीव लोचन की रिपोर्ट…
राजगीर (नालंदा)। राजगीर में ढाई साल पर लगने वाले मलमास मेला का काफी महत्व है। इस मेले को पुरूषोतम मास(अधिकमास) भी कहा जाता है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के डॉ. धीरेन्द्र उपाध्याय जी बताते हैं कि सनातन धर्म के इस मलमास मेले में तैंतीस कोटि देवी-देवता राजगीर में ही विराजमान होते हैं। इस कारण बहुत बड़े शुभ कार्य इस मेले की अवधि के समय में नहीं होते हैं। शुभ कार्यों को अशुभ माना जाता है। वहीं मेले में कुंड स्नान का काफी महत्व होता है। लोग लाखों की संख्या में देश व विदेश से यहां पर कुंड स्नान करने आते हैं। साथ ही वैतरणी नदी के पास श्रद्धालु लोग पिंड दान भी करते हैं। इस मेले के दौरान गाय की पूंछ को पकड़कर वैतरणी नदी को पार करना काफी शुभ माना जाता है।

डॉ. उपाध्याय ने बताया कि इस साल भी मलमास मेला लगने वाला है। इसकी तैयारी अभी से ही पंडा कमेटी व प्रशासन कर रही है। राजगीर तपो भूमि रही है। हमारी संस्कृति विश्व की जननी रही है। एक माह तक चलने वाले मेले में आने वाले लोगों के मनोरंजन के लिए सर्कस, मौत का कुंआ, मीना बाजार सहित अनेक प्रकार की प्रदर्शनी लगायी जाती है। साथ ही लोगों के ठहरने के लिए यात्री शेड भी बनाया जाता है। मेले के दौरान सरस्वती व वैतरणी नदी में महाआरती कराने की परंपरा रही है। इसमें सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
