नालंदा और हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के बीच साझेदारी की नई शुरुआत, शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा प्रदान करने वाला एमओयू

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अनुमंडल संवाददाता, राजगीर।

राजीव लोचन की रिपोर्ट…

राजगीर(नालंदा)। हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इजराइली संसद (नेसेट) में दिये गये उनके वक्तव्य के लिए आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय ने हाल में नालंदा विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन(एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं जो दोनों संस्थानों के बीच बढ़ते शैक्षणिक सहयोग को दर्शाता है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि हमारे राष्ट्रों के बीच गहरी साझेदारी शैक्षणिक क्षेत्र में भी परिलक्षित होती है। यह एमओयू दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ समय से चल रहे सार्थक शैक्षणिक संवादों का परिणाम है। हिब्रू विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपाध्यक्ष प्रो. गाय हारपाज और उनकी टीम ने नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति तथा संकाय सदस्यों से भी संवाद किया है। माह के शुरू में हिब्रू विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन निदेशक एवं इतिहास, धर्म और क्लासिक्स अध्ययन संस्थान के प्रमुख प्रो. एवीअतार शुलमैन ने नालंदा विश्वविद्यालय में एक विशिष्ट व्याख्यान भी दिया। यह एमओयू संकाय एवं छात्र आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरक के तौर पर काम करेगा। इसके माध्यम से संयुक्त शोध पहल, अकादमिक विनिमय, समेकित अध्यापन तथा दोनों देशों के बीच गहन सभ्यतागत संवाद को प्रोत्साहित किया जायेगा। कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि हिब्रू विश्वविद्यालय के साथ यह समझौता दोनों देशों के प्राचीन संबंधों को और सुदृढ़ करेगा। हमारे संकाय और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शोध अवसर सृजित करेगा। विद्यार्थियों के शोध कौशल, नवाचार क्षमता और करियर संभावनाओं को नई दिशा प्रदान करेगा। नालंदा विश्वविद्यालय हिब्रू विश्वविद्यालय के साथ मिलकर शोध उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने, अंतर-सांस्कृतिक समझ को प्रोत्साहित करने और दोनों देशों के बीच स्थायी शैक्षणिक सेतु निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

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