महान स्वतंत्रता सेनानी जुब्बा सहनी का 82वां शहादत दिवस मनाया गया

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बलिदान दिवस पर याद किए गए अगस्त क्रांति के महानायक

प्रेम सिंघानिया की रिपोर्ट,

राजगीर (नालंदा) । राजगीर स्थित निषाद आश्रम में रविवार को महान स्वतंत्रता सेनानी और अगस्त क्रांति के महानायक अमर शहीद जुब्बा साहनी का 82वां शहादत दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, केवट-निषाद समाज के लोग तथा उनके अनुयायी मौजूद रहे।

समारोह की अध्यक्षता केवट जागृति मंच के संस्थापक त्रिलोक सिंह निषाद ने की, जबकि मंच संचालन मंच के सचिव गौतम कुमार केवट ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अमर शहीद जुब्बा सहनी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

अध्यक्षीय संबोधन में त्रिलोक सिंह निषाद ने कहा कि महापुरुषों के इतिहास और उनके बलिदान को याद कर उनसे प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने जुब्बा सहनी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्विट इंडिया मूवमेंट के दौरान 16 अगस्त 1942 को मीनापुर थाना में अंग्रेज दरोगा लुईस वालर को थाने के अंदर मिट्टी तेल छिड़ककर जलाने की घटना ने आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। इसी मामले में उन्हें 11 मार्च 1944 को भागलपुर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई। उन्होंने अपने 52 साथियों पर लगे आरोप को अपने ऊपर लेकर हंसते-हंसते फांसी का फंदा स्वीकार किया था।

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उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में राजगीर स्थित निषाद आश्रम की स्थिति जर्जर हो चुकी है, जिसके नवनिर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए निषाद समाज से सहयोग की अपील की गई।

मौके पर शंखनाद के महासचिव और समाजसेवी राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि जुब्बा सहनी का जीवन देशभक्ति, साहस और त्याग की अमर गाथा है। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति देकर देशवासियों को स्वतंत्रता का मार्ग दिखाया। उनका बलिदान आज भी नई पीढ़ी को राष्ट्रसेवा और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरित करता है।

मंच संचालन करते हुए गौतम कुमार केवट ने कहा कि जुब्बा सहनी ने सपना देखा था कि आजादी के बाद समाज को आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में बराबरी का अधिकार मिलेगा, लेकिन आज भी उनका यह सपना अधूरा है।

समाजसेवी परमेश्वर केवट ने कहा कि जुब्बा सहनी ने देश और समाज के उत्थान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका सपना तभी पूरा होगा जब देश में वंचित और कमजोर वर्गों को समान अधिकार मिलेगा।

कार्यक्रम में अनिल केवट ने कहा कि अमर शहीद जुब्बा सहनी ने सभी क्रांतिकारी आरोपों को अपने ऊपर लेकर हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमकर मातृभूमि के प्रति अपना कर्तव्य निभाया। वहीं अधिवक्ता चंद्र भूषण ने उन्हें राष्ट्रीय आंदोलनों का सच्चा प्रेरणास्रोत बताते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने की अपील की।

इस अवसर पर धर्मवीर सिंह, सुमित बिहारी, गौशनगर के शैलेश निषाद, रमेश केवट, जगन केवट, नंदलाल केवट, उदय केवट, अरविंद केवट, राम इत्तर केवट, कलकत्ता हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजू कुमार, नवादा के राजेंद्र प्रसाद, रोहित कुमार, प्रदीप कुमार महतो तथा फिल्म अभिनेता संजय निषाद सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने शहीद जुब्बा सहनी की स्मृति को जीवित रखने और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

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