नालंदा में 18 परीक्षा केंद्रों पर दरोगा भर्ती परीक्षा, तीन स्तरीय सुरक्षा के बीच 24,336 अभ्यर्थी हुए शामिल

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बिहार शरीफ। नालंदा जिले में दरोगा भर्ती की प्रारंभिक लिखित परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। जिलेभर में कुल 18 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां 24,336 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया।

परीक्षा के दौरान तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। सभी परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को प्रवेश से पहले सघन जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। फोटो पहचान पत्र, एडमिट कार्ड और चेहरे का मिलान करने के बाद ही अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश दिया गया। सुरक्षा के मद्देनज़र जूते उतरवाकर जांच की गई तथा मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और पर्स ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था।

बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

परीक्षा की निगरानी के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। कुल 39 केंद्र प्रेक्षक सह स्टैटिक दंडाधिकारी, 9 जोनल दंडाधिकारी एवं 4 उड़नदस्ता दंडाधिकारी नियुक्त किए गए थे। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर एक केंद्र पर्यवेक्षक के साथ दो-दो स्टैटिक दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी तैनात किए गए थे।

इसके अलावा 9 गश्ती दल दंडाधिकारी एवं 4 वरिष्ठ पदाधिकारियों को उड़नदस्ता दल के रूप में नियुक्त किया गया, जो विभिन्न परीक्षा केंद्रों का लगातार निरीक्षण करते रहे।

नियंत्रण कक्ष और सख्त निगरानी

परीक्षा के सुचारु संचालन के लिए जिला स्तर पर एक नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई थी। किसी भी समस्या की स्थिति में परीक्षार्थी या उनके अभिभावक टोल-फ्री नंबर 18003456323 पर संपर्क कर सकते थे। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (शिक्षा) को नियंत्रण कक्ष का वरीय प्रभारी बनाया गया था, जबकि एक कार्यपालक दंडाधिकारी की भी वहां प्रतिनियुक्ति की गई थी।

सभी प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी सुबह 7 बजे तक अपने-अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए थे। परीक्षा अवधि के दौरान सभी केंद्रों पर वीडियोग्राफी कराई गई तथा सीसीटीवी कैमरों से निरंतर निगरानी रखी गई।

परीक्षा केंद्रों के 500 गज की परिधि में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू रही, जिससे किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

जिला मुख्यालय बिहार शरीफ में परीक्षा के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अलग से दंडाधिकारी एवं पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

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