धन संचय की तरह जल संचयन भी आवश्यक : डॉ. दयानंद मुनि

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अनुमंडल संवाददाता, राजगीर।

राजीव लोचन की रिपोर्ट…

राजगीर(नालंदा)। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं सकल हिंदू समाज द्वारा संयुक्त रूप से रविवार को राजगीर के नई पोखर ठाकुरबाड़ी में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में सैंकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। इसमें लोगों ने राष्ट्र निर्माण, धर्म रक्षा, सामाजिक समरसता तथा जल संचयन जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। सम्मेलन में कम संख्या में लोगों के आने से संत समाज ने चिंता भी जतायी। थावे विद्यापीठ के महंत राष्ट्रीय धर्माचार्य एवं धर्म रत्न डॉ. स्वामी दयानंद मुनि ने कहा कि संघ की 100 वर्ष की यात्रा त्याग, तपस्या, सेवा और राष्ट्र समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि संगठन की शक्ति, सामाजिक दायित्व और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के संकल्प को सुदृढ़ करने का समय है। राजगीर के ऐतिहासिक महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि यह नगर प्राचीन काल से आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक चेतना की केंद्र भूमि रही है। यहां से नीति, धर्म और सामाजिक समरसता का संदेश विश्वभर में प्रसारित हुआ है। धर्मांतरण के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वामी दयानंद मुनि ने कहा कि किसी भी प्रकार के प्रलोभन, भय या भ्रम के माध्यम से किया गया परिवर्तन सामाजिक असंतुलन को जन्म देता है। उन्होंने समाज को शिक्षा, सेवा, संस्कार और आत्मविश्वास के माध्यम से सशक्त बनाने पर बल दिया। साथ ही जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि जिस प्रकार धन का संचय आवश्यक है, उसी प्रकार जल संचयन भी समय की मांग है। उन्होंने प्रशासन से धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, पारदर्शी प्रबंधन और संत समाज के सम्मान की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया। सम्मेलन में महामंडलेश्वर विवेक मुनि जी महाराज, लक्ष्मण शरण जी महाराज, सुमन आनंद महाराज, सरदार अमनदीप सिंह, महंत अर्जुन ब्रह्मचारी, रामजी प्रसाद सिन्हा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपनी बातें रखीं।

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