नालंदा जिले को राष्ट्रीय गौरव: 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 के सम्मान समारोह में शामिल होने नई दिल्ली पहुँचे डीएम कुंदन कुमार
नालंदा (बिहार) : जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित 6वाँ राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 एवं जल संचय–जन भागीदारी (JSJB) पुरस्कार के सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए नालंदा के जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार नई दिल्ली पहुँचे हैं। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान 18 नवम्बर 2025 को प्रातः 11:30 बजे विज्ञान भवन, नई दिल्ली में भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया जाएगा।
राष्ट्रीय जल पुरस्कार का उद्देश्य देश में जल संरक्षण, जल प्रबंधन, भू-जल पुनर्भरण, सतत विकास और जन-सहभागिता को बढ़ावा देना है। नालंदा जिले की यह उपलब्धि न केवल बिहार के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। MGNREGA की मजबूत कार्यशैली, पंचायतों की सक्रियता, नगर निकायों की भागीदारी और जल-जीवन हरियाली अभियान की रणनीतिक दिशा ने नालंदा को JSJB 1.0 के तहत राष्ट्रीय स्तर का मॉडल जिला बनाया है।
नालंदा जिले ने जल संचय–जन भागीदारी पहल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बनाई है। जिले को जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और सामुदायिक सहभागिता आधारित प्रयासों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु चयनित किया गया है। JSJB 1.0 के तहत नालंदा को ₹25 लाख की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। जिले ने 12,051 जल-संरक्षण एवं भू-जल पुनर्भरण संरचनाएँ पूरी कर राष्ट्रीय लक्ष्य 10,000 से अधिक उपलब्धि दर्ज की है, जो राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है।
MGNREGA के तहत जिले में किए गए व्यापक जल संरक्षण कार्य JSJB अभियान की रीढ़ साबित हुए हैं। चेक डैम, आहर–पइन एवं तालाबों का जीर्णोद्धार, रिचार्ज पिट, सोख्ता निर्माण, जल निकासी सुधार, खेत-तालाब निर्माण और जल प्रवाह नियंत्रण ढाँचे जैसी संरचनाओं ने जिले में स्थायी जल-संसाधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इससे हजारों लोगों को रोजगार के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी लाभ मिला। आहर–पइन प्रणाली का पुनर्जीवन नालंदा की पहचान बनकर उभरा।
पंचायती राज विभाग ने कार्यस्थल चयन, जन-जागरूकता और सामुदायिक निगरानी में अहम भूमिका निभाई। पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्रामीण समुदाय को पारंपरिक जल-स्रोतों जैसे पुराने कुओं, आहर–पइन, तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए प्रेरित किया। पंचायत स्तर पर वर्षा-जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण योजनाओं के तहत सोखता निर्माण को बड़े पैमाने पर लागू किया गया।
नगर विकास एवं आवास विभाग ने शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल-संचयन को बढ़ावा दिया। नगर निकायों ने ड्रेनेज सुधार, जलभराव नियंत्रण, शहरी तालाबों के पुनर्जीवन, कुओं के जीर्णोद्धार और सोखता निर्माण जैसे कार्यों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया। “Catch the Rain” अभियान को JSJB से जोड़कर पूरे शहरी क्षेत्र में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए।
बिहार सरकार के जल-जीवन हरियाली अभियान ने नालंदा की उपलब्धियों को मजबूती दी। अभियान ने वर्षा जल-संचयन को जन-आंदोलन का रूप देने, जल-निकायों की पहचान, सर्वेक्षण और विकास करने, वृक्षारोपण व जल संरक्षण गतिविधियों को गति देने और जन-सहभागिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जल-सम्मेलन, जागरण रैलियाँ तथा हरित संदेश यात्राओं ने जल संरक्षण को जनजीवन का हिस्सा बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।
विभिन्न विभागों — MGNREGA, पंचायती राज, कृषि, नगर निकाय, PHED तथा प्रशासनिक इकाइयों — के समन्वित प्रयासों ने नालंदा को JSJB 1.0 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी जिलों में स्थान दिलाया। नालंदा बिहार के उन सफल जिलों में शामिल है जिन्हें कैटेगरी-3 के तहत ₹25 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। जिले की उपलब्धियों में 12,051 संरचनाओं का निर्माण, आहर–पइन प्रणाली का पुनर्जीवन, भू-जल स्तर में वृद्धि, सिंचाई क्षमता में सुधार और पंचायतों व नागरिक समूहों की मजबूत भागीदारी प्रमुख हैं।
