नालन्दा की ग्राम कचहरी और मनरेगा का पंचायत व्यवस्था बनी रोल मॉडल, झारखण्ड में भी अपनाने की उठी मांग
बिहार शरीफ, नालन्दा । झारखण्ड के विभिन्न प्रखण्डों से एक्सपोजर विजिट पर आए जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने नालन्दा जिले के विभिन्न पंचायतों का भ्रमण कर वहाँ संचालित योजनाओं एवं कार्यों का गहन अवलोकन किया। इसी क्रम में प्रतिभागियों ने चोरसुआ पंचायत का भ्रमण कर पंचायत स्तर पर किए जा रहे विकास कार्यों को नजदीक से देखा।
पंचायत भ्रमण के दौरान चोरसुआ पंचायत के मुखिया श्री चन्दन कुमार एवं अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा सभी अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। प्रतिभागियों ने पंचायत में मनरेगा एवं ग्राम कचहरी के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की खुले मन से सराहना की।

पाकुड़ जिले के बरतल्ला पंचायत के मुखिया मो0 अनवर अंसारी ने बताया कि झारखण्ड में मनरेगा योजना के अंतर्गत केवल कच्चे कार्य ही कराए जा सकते हैं, जबकि चोरसुआ पंचायत में मनरेगा से कच्चे कार्यों के साथ-साथ पक्के कार्यों का भी सफल क्रियान्वयन किया गया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना से निर्मित मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र, खेल का मैदान, प्रत्येक खंधे तक कच्ची सड़कों का निर्माण अत्यंत सराहनीय है और वे अपने पंचायत क्षेत्र में भी इस मॉडल को लागू करने का पूरा प्रयास करेंगे।
वहीं ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर अभिषेक गोंड ने बिहार में ग्राम कचहरी की स्थापना एवं उसके प्रभावी क्रियान्वयन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। प्रतिभागियों ने ग्राम कचहरी में निपटारे हेतु आए विभिन्न विवादों की कार्यवाही को देखा और ग्राम स्तर पर सुलभ, सस्ती एवं त्वरित न्याय व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे झारखण्ड में भी लागू करने की बात कही।

इस अवसर पर सरपंच राकेश कुमार एवं उपसरपंच केदार प्रसाद ने ग्राम कचहरी की कार्यप्रणाली, अधिकार क्षेत्र एवं मामलों के निष्पादन की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। प्रखण्ड पंचायती राज पदाधिकारी रंजीत कुमार ने कहा कि एक्सपोजर विजिट के माध्यम से जनप्रतिनिधि एक-दूसरे के राज्यों की सफल योजनाओं से सीखते हैं और उन्हें अपने क्षेत्र में लागू करने की दिशा में पहल करते हैं। उन्होंने झारखण्ड की ‘दीदी बाड़ी योजना’ को बिहार में भी लागू करने हेतु प्रयास करने की बात कही।
इस दौरान संजीव कुमार, प्रमोद कुमार, ममता देवी, राजेश दास, मो0 शाकिर, शकील अंसारी, गुड़िया कुमारी, राजीव कुमार, गौतम कुमार, सौरभ प्रकाश, विनेश्वर प्रसाद, मुखी प्रसाद, सूर्यकांत वर्मा, मनोज प्रभाकर, सेवन हरेराम, राम मुर्मू, लखिंदर रजक एवं जियाउद्दीन शेख सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी अपने-अपने विचार साझा किए और बिहार के पंचायत मॉडल को अनुकरणीय बताया।
